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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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उनके पीछे येसूबाई राजमहल का आँगन पार करके बाहर निकल रहे थे। शिवाजी महाराज, आश्चर्यचकित होकर शम्भूराजा को पीछे से देखते रह गये। तीन उस दिन महादरवाजे के पहरे पर रायप्पा था। दोपहर में किले पर चहल-पहल कम होती है। उसी समय एक सजी हुई साँड़नी दरवाजे के सामने आकर खड़ी हुई। उसके साथ भास्कर ठाकुर और दो फिरंगी सवार थे। उनके आते ही पहरे पर तैनात सूबेदार ने अन्दर जाने का संकेत किया। वे लोग अन्दर प्रवेश करने ही वाले थे कि रायप्पा अड़ गया। वह कड़ी आवाज में पूछने लगा— "कौन हैं आप? कहाँ से आये हैं?" "जाने दे रे रायप्पा, गोवेकर वकील रामजी ठाकुर के लोग हैं। उनको अण्णाजी पन्त के बाड़े में जाना है।" ऐसा लगा कि सूबेदार को उनके आने के पहले से ही उनके बारे में जानकारी थी। रायप्पा कुछ हड़बड़ाया किन्तु तत्काल सँभलते हुए बोला, "वकील के लोग हैं तो उन्हें महाराज को मिलना चाहिए।" "परन्तु उनको पन्त सुरनवीस (एक पद) को मिलना होगा तो?" "पर इस प्रकार का आदेश कहाँ सूबेदार?" "रायप्पा किसलिए फालतू बखेड़ा करता है? बड़े महाराज आज किले में नहीं हैं।" "तब ये लोग युवराज से मिलें।" सूबेदार रायप्पा को मनाने लगा। इससे रायप्पा और सावधान हो गया। वह बाहर से भले ही जंगली और मतलबी दिखे लेकिन जंगली पक्षियों की धीमी आवाज की तरह चोरों की हल्की आवाज को सहज ही पहचानता था। इसलिए पुर्तगाली वाइसराय के वकील का अण्णाजी पन्त को चोरी से कुछ भेजने में उसे दाल में काले की शंका हुई। उसने गोवेकर लोगों को वहीं पर रोककर युवराज के पास सन्देश भेजा। शम्भूराजा का आदेश मिला तो रायप्पा ने सभी को ले जाकर शम्भूराजा के दरवाजे पर खड़ा किया। शम्भूराजा ने भास्कर ठाकुर से कड़ी आवाज में पूछा, "सच-सच बताओ, किसका है यह सामान? क्या है इस सन्दूक में?" लिपिक गोवेकर हड़बड़ा गया। उसने साफ-साफ बोल दिया—"दो बड़े सम्भाजी :: 29