छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइनमें सबसे अधिक इज्जत में अलाउद्दीन खिलजी साहब की करता हूँ। वे यहाँ की प्रजा को ठिकाने पर ले आये थे। पालतू घोड़ा, कुतिया और प्रजा ही नहीं सभी जानवरों को काबू में रखना चाहिए। मुझे भी यहाँ की प्रजा की गर्दन पर तलवार रखकर सियामत करना बहुत पसन्द आता है।" आज के भोज में शहजादा आजम उपस्थित नहीं था। उसे सम्भाजी के समाचार के लिए दक्षिण की ओर भेज दिया गया था। अपनी फौज में सबसे अधिक कुशल और किसी भी संकटपूर्ण कार्य को सम्पन्न करने में सक्षम अपने बड़े बेटे मुअज्जम की ओर देखा। सभी पर नजर डालते हुए बादशाह ने कहा- "इस बार की यह दक्षिण मुहिम मेरे लिए नहीं है। बल्कि हमारे दो शहजादों के लिए एक इम्तिहान है। क्यों असद खान?" "जैसी आपकी मर्जी किबलाए आलम।" "मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ। मेरे बाद इस बादशाहत का कार्य भार कौन सँभालेगा? मेरा उत्तराधिकारी कौन बनेगा? यह निश्चित करने का समय अब आ गया है।" बादशाह के इस कथन से मुअज्जम चौंका। उसकी बेगम आँखें फाड़कर इधर उधर देखने लगीं। उसी समय बादशाह को कुछ स्मरण हुआ। आकाश से अचानक झर झर बरसात करने वाली घटा के समान उसके चेहरे पर एक छाया आयी और चली गयी। किसी की भी चिन्ता किये बिना बादशाह कहने लगा- "आजम क्या और मुअज्जम क्या, मेरे बाद हिन्दुस्तान के तख्त पर बैठने की इन दोनों में योग्यता नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य! क्या किया जाये? हमारी गद्दी पर बैठने और ताज पहनने की जिसमें काबिलियत थी अपना वही शहजादा बेवकूफ निकला। बगावत करके जानी दुश्मन से जा मिला। रहम आता है उस शहजादे पर। अल्लाहताला ने उसे इतना सब कुछ दिया किन्तु उसकी बेवकूफी और बदनसीबी ने सब कुछ छीन लिया। शहजादा अकबर की याद से बादशाह का हृदय ऐसे लहूलुहान हो रहा था मानो किसी ने उसके कलेजे में कटार भौंक दी हो। यह दृश्य देखकर बादशाह के मारे मेहमान सहम गये थे। बगावत की कल्पना से बादशाह का चेहरा लाल हो गया। वह गरजा-"हमारे शासन में जो विद्रोह की कोशिश करता है, वह खाक हो जाता है। क्योंकि बगावत और गद्दारी की सही कला केवल इस औरंगजेब को आती है। मेरे जन्मदाता पिता का दिमाग जिस समय खराब हुआ उस समय उन्हें भी बुढ़ापे में मैंने सबक सिखाया। उसके लिए आगे पीछे नहीं देखा। जिस तरह किसी पेड़ की टहनी को सहजता से तोड़ दिया जाता है उसी प्रकार मैंने अपने बेवकूफ भाइयों को श्मशान का रास्ता दिखाया। दुश्मनों की खैरियत चाहने वाली बहनों को हमेशा सम्भाजी 313