छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंके लिए बन्दीखाने के अँधेरे में ढकेल दिया। मुझे इतना ही कहना है, बस! हमारे बाद दिल्ली का बादशाह कौन हो? यह निर्णय मैंने अपने पिता को भी नहीं करने दिया। किन्तु मेरे बाद दिल्ली का बादशाह कौन होगा? यह निर्णय केवल मैं ही करूँगा। हमारे शहजादों में जो दक्षिण की फ़तह हासिल करेगा, सम्भा जैसे मूर्ख को कुचल देगा, उसी के सिर पर हम अपने हाथ से गर्व के साथ हिन्दुस्तान का ताज पहनाएँगे।'' चार हंबीरराव अपनी फौज के लिए अधिक रसद और गोला बारूद प्राप्त करने के लिए राजधानी रायगढ़ आये थे। राजधानी में सेनापति हंबीरराव मोहित येसूबाई से मिले। सोयराबाई ने इसी समय उनके लिए बुलावा भेजा। हंबीरराव इस सन्देश से चकित हुए। क्योंकि सम्भाजी के द्वारा रायगढ़ का कार्यभार सँभालने के बाद लगभग डेढ़ वर्षों में सोयराबाई से उनकी भेंट नहीं हुई थी। हंबीरराव ने स्वयं दो तीन बार सोयराबाई से मिलने की कोशिश की थी। किन्तु सोयराबाई को उनका मुँह देखना गँवारा नहीं था। अपनी बड़ी बहन के क्रोध का कारण हंबीरराव को मालूम था। ऐन मौके पर हंबीरराव ने सब काम चौपट कर दिया। अपने भांजे का राजा बनना जब सगे मामा को ही पसन्द नहीं है तो दूसरों को क्या दोष देना? सोयराबाई की ये कटूक्तियाँ हंबीरराव के कानों तक बार-बार पहुँचती थीं। सोयराबाई का अन्धा पुत्र प्रेम, अपने स्वार्थ के लिए शम्भुराजा के प्राणों की भूख, उसके लिए खतरनाक साजिशों में शामिल होना आदि सभी को मालूम हो गया था। इसी से सन्तप्त शम्भुराजा ने सोयराबाई के महल पर जाकर शोर मचाया था। यह बात महीने डेढ़ महीने पहले की थी। उसके बाद सोयराबाई की पालकी केवल दो बार जगदीश्वर का दर्शन करने गयी थी। रायगढ़ के निवासियों ने इसे देखा था। इसके अतिरिक्त वे पूरे दिन अपने महल में रहती थीं। उनका स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं था। हंबीरराव ने जब अपनी बड़ी बहन को देखा तो उनका कलेजा फट गया। ३१४ : सम्भाजी