छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतत्काल मिलना चाहते थे। उस समय शम्भूराजा अपने विश्वस्त सहकारियों और कर्मचारियों के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे। उन्होंने कुछ खिन्नता के स्वर में कहा, ‘‘अब शाम हो गयी है। उन्हें कल सुबह ही मिलने को कहो।’’ ‘‘जी! जैसी आपकी आज्ञा।’’ गुप्तचर अभिवादन करके चला गया। किन्तु शम्भूराजा ने तुरन्त उस जासूस को रोककर कहा, ‘‘ऐसा करो, उन बेचारों को अभी भेज दो। नहीं तो किले के दरवाजे बन्द हो जाएँगे और उन बेचारों को नाहक रुकना पड़ेगा।’’ शम्भूराजा के सामने आते ही उन साधारण किसानों के गले रुँध गये। वे राजा के पैरों में गिरकर रो-रोकर अपना दुखड़ा सुनाने लगे—‘‘महाराज उन हैवान सिद्दियों ने हमारे गाँव के पचीस युवकों का अपहरण कर लिया है।’’ ‘‘उनमें हमारे नागोण्णे के व्यापारियों के लड़के भी हैं।’’ एक व्यापारी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। ‘‘कविराज! सिद्दी इन तरुणों को कहाँ ले जाता है ? क्या करता है उनका ?’’ शम्भूराजा ने पूछा। ‘‘मुम्बई, अँग्रेज अच्छी खासी रकम देकर इन तरुणों को खरीदते हैं और उन्हें गुलाम बनाते हैं। मुम्बई में गुलामों का व्यापार अधिकांशतः हमारे प्रदेश के बच्चों से ही चलता है।’’ कवि कलश ने सूचित किया। शम्भूराजा बहुत गम्भीर हो गये। उन्होंने सरकारी खजाने से इन ग्रामीणों को कुछ धन दिया। उनके कष्ट को कम करने की हर सम्भव कोशिश की। उन्होंने प्रजा को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘हम शीघ्र ही इन सिद्दियों की कोई न कोई व्यवस्था करेंगे।’’ किसानों को कुछ राहत मिली। शम्भूराजा ने तत्काल कवि कलश को पत्र लिखने के लिए कहा, ‘‘कविराज, मुम्बई के अँग्रेज वार्ड साहब को बताइये कि हमारे राज्य में जवानों की गुलामों की तरह नीलामी करोगे तो ठीक नहीं होगा। यह जानो कि नारियल और आदमी के सिर में अन्तर होता है। न्यायपूर्ण ढंग से रहो अन्यथा हम तुम्हें तुम्हारी गोदियों से बाहर नहीं निकलने देंगे।’’ इस पत्र के बाद ही शम्भूराजा ने चौलबन्दर के सूबेदार को आदेश दिया— ‘‘समुद्र पर पहरा बैठा दो। अँग्रेजों के मुम्बई की ओर जाने वाले अनाज से भरे जहाजों को रोको और लूट लो। हमारे प्रदेश का एक भी अनाज उन गोरे बदमाशों को नहीं मिलना चाहिए।’’ पत्र तुरन्त भेजे गये। विशालकाय समुद्र भँवर में फँसकर जैसे कोई चीज गोल मोल घूमती रहती है, उसी प्रकार शम्भूराजा का मस्तिष्क समुद्र के सम्बन्ध में 328 :: सम्भाजी