छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजंजीरा ! जंजीरा ! एक ब्रिटिश वकील हेनरी आक्सीडेन ने एक बार रायगढ के किले पर शम्भुराजा से कहा था—'अच्छा हुआ जो आपके पिताजी नाविक के रूप में पैदा नहीं हुए नहीं तो जमीन के साथ साथ इस विशाल समुद्र के भी मालिक बन गये होते।' हेनरी के इस कथन को शम्भुराजा कभी भूलते नही थे। जब जब समुद्र का नीला विस्तार उनके सामने आता, उनकी भावनाएँ तीव्र हो उठतीं। कभी कभी वे अपना घोड़ा लेकर समुद्र के किनारे जाते और देर-देर तक खड़े होकर उसे देखते रहते। समुद्र में उठती ऊँची लहरों को देखकर वे विभोर हो जाते थे। दो दो पोरसा ऊँची उठती लहरों को देखकर शम्भुराजा उन्मत्त हो उठते थे। उनके फेफड़ों में हवा प्रविष्ट होकर एक नया तूफान पैदा कर देती थी। ऊपर सूरत से लेकर नीचे कारवार तक सम्पूर्ण समुद्री किनारे को अपने अधिकार में करना शिवाजी महाराज का चिरपोषित स्वप्न था। उस स्वप्न को पूरा करने के लिए शम्भुराजा का चित्त व्यथित और व्यग्र हो उठता था। एक बार शिवाजी महाराज ने शम्भुराजा को अत्यन्त सरल शब्दों में बताया था—"खेत में फसल के तैयार होते ही जंगली सुअर नाक उठाकर उसकी ओर देखने लगते हैं, फसलों पर आक्रमण करते हैं। ये पुर्तगाली, अँग्रेज सिद्दी आदि भी पानी के सुअर हैं। जब कोई जंगली सुअर किसी मनुष्य पर आक्रमण करता है तो एकदम सीधी रेखा में दौड़ता है। उसकी नाक के पास के दोनों दाँत तेंदुओं के काँटो से भी अधिक तीक्ष्ण और धारदार होते हैं। उनके वार से मनुष्य घायल होने से बच नहीं सकता। समुद्र के तीनों पशु समूह उन सुअरों की भाँति ही हमारे स्वराज्य को प्यासी नजरों से घूरते रहते हैं।" शम्भुराजा अपने पराक्रमी पिता को बार बार स्मरण करते। गुप्तचर ने खबर दी कि नागवणे और रोह्या के कुछ किसान शम्भुराजा से सम्भाजी 327