छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 328, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंमाफ हो, हम सभी आपके पिताजी को अत्यन्त पाक-साफ और पवित्र मानते थे।'' "जाने दीजिए कविराज ! माना कि मेरे अब्बाजान एक पापी आदमी हैं। परन्तु अपने जन्मदाता बाप की कितनी बुराई की जाये ? इसकी भी कोई सीमा है कि नहीं ?'' बोलते बोलते शहजादा अकबर बहुत गम्भीर होने लगा—"हमारे अब्बाजान के असली और नकली रूप को तो अल्लाह ही जाने, किन्तु वे अल्लाह और इस्लाम की सेवा का अभिनय खूब करते हैं। दिन-रात नमाज पढ़ते हैं, मुल्ला-मौलवियों की सभा में सिर ऊँचा करके बैठते हैं, कुरान की प्रतियाँ बनाते हैं, उसमें चित्र निकालते हैं, टोपियाँ सिलते हैं और उससे प्राप्त धन को किसी मस्जिद को दान कर देते हैं। सच कहें तो मुझे कुछ और ही लगता है। हमारे अब्बाजान ने जीवनभर पाप किया, अपने भाइयों का सिर काटा, उनके शहजादों को कुचलकर मार डाला, अपने बूढ़े बाप के साथ छल किया। उनके पापों के पिशाच रात को ही नहीं दिन में भी उनकी आँखों के आगे नाचते रहते होंगे।'' 326 :: सम्भाजी