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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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पंक्ति में ही रायगढ़ नरेश भी बैठे थे। पत्तल पर मासाड किस्म का चावल और मछली का सालन परोसा गया था। सम्भाजी राजा के साथ पंक्ति में बैठकर भोजन करते समय सभी के सीने तने हुए थे। शाम का समय था। खाड़ी पर एक बड़ा जहाज आता हुआ दिखाई दिया। उम पर हरा झंडा फहरा रहा था। उस पर एक विचित्र प्राणी का चित्र बना था। उस बड़े जहाज को उथले पानी में ले जाने की कठिनाई के कारण गहरे हिस्से में ही रोका गया। सीढ़ियाँ लटका दी गयीं। उस जहाज की ओर भयानक और दौलत खान ने बड़े अभिमान से देखा। शम्भुराजा भी प्रसन्न दृष्टि से देख रहे थे। एक छोटी नाव लेकर मराठा सैनिक पानी में उतर पड़े। आगत अतिथियों का स्वागत करने के लिए दौलत खान और भयानक भंडारी आगे बढ़े। उस जहाज से उतरकर हष्ट-पुष्ट महाकाय सेनानी उतरकर आया। उसने कमर तक झुककर सम्भाजी राजा का अभिवादन किया। "आइए जंगेखान। हमें आपका ही इन्तजार था।" ऐसा कहते हुए शम्भूराजा ने जंगेखान को अपनी बाँहों में भर लिया। वे अपने सहकारियों को गर्व से देखते हुए बोले, "ये हैं अरबों के सेनाधिकारी जंगेखान, हमारे स्वराज्य के मित्र। इन्हीं के मार्गदर्शन में हमारे गोलंदाज अचूक निशाना लगाने और समुद्री युद्ध का प्रशिक्षण लेने वाले हैं।" सभी ने उत्साहपूर्वक जंगे खान का स्वागत किया। जंगेखान अपनी सेना के साथ अरब सागर में हमेशा घूमता रहता था। विशेष रूप से अरब देश से हिन्दुस्तान आने वाले जहाजों को संरक्षण देना और अपने राज्य के व्यापारिक हित की रक्षा करना उसी की जिम्मेदारी थी। अरब के सुल्तान ने यह कार्य उसी को सौंपा था। शाम के समय एक सजे-सजाये विशेष कक्ष में सम्भाजी और जंगे खान की बातचीत चल रही थी। "आपका दोस्त जंजीरे का सिद्दी क्या कहता है?" सम्भाजी ने हँसते हुए पूछा। "उसकी और हमारी जाती दुश्मनी के कारण ही तो हम आप दोस्त बने हैं।" जंगे खान ने सोत्साह कहा। चर्चे के दौरान जंगे खान ने सूचित किया- "राजन! सारे परदेशियों-फिरंगियों में बहुत से आपसी मतभेद और झगड़े हैं। किन्तु मराठों की बड़ी सेना संगठित न करने देने के मुद्दे पर सभी एक हो जाते हैं।" "उसकी जानकारी मुझे है।" सम्भाजी राजा ने कहा। जंगेखान कोंकण के तट पर कुछ दिन और रुकने वाला था। उसके साथी कारीगर कम समय में बड़े जहाज किस प्रकार तैयार कर लेते हैं। इसका प्रशिक्षण वह मराठी लुहारों और सुनारों को देने वाला था। सात समुद्रों का खारा पानी पचाने सम्भाजी 337