छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 340, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंवाली और पालों को फाड़ देने वाली तेज हवा का मुकाबला करते हुए अरबी जहाजें आसानी से सफर कर रहे थे। साथ ही दूर तक निशाना साधने वाली तोपों को बिठाने और निशाने पर दागने का प्रशिक्षण भी ये लोग देने वाले थे। इसलिए मराठा नाविक दल बहुत उत्साहित था। शाम को जंगेखान ने आग्रहपूर्वक सम्भाजी राजा को अपने अरबी जहाज पर अरबी भोजन के लिए आमन्त्रित किया। अरबी जहाज पर चलते समय सम्भाजी राजा ने एक अँधेरे कोने में कुछ हलचल अनुभव की। उन्होंने मशालची को बुलाया। प्रकाश में उन्होंने देखा कि दो-ढाई सौ नंग-धड़ंग आदमी उस अँधेरी कोठरी में बन्द हैं। प्रकाश पड़ते ही ये सभी भेड़-बकरियों की तरह सहमकर काँपने लगे। उनकी दाढ़ी और सिर के बाल बढ़े हुए थे। उनके नंगे शरीर पर जख्मों के निशान दिख रहे थे। कई दिनों से स्नान न करने के कारण उनके शरीर से दुर्गन्ध आ रही थी। "चलिए राजन! इन्हें छोड़िए। ये तो हमारे गुलाम हैं।" जंगेखान ने कहा। चलते-चलते शम्भूराजा खड़े हो गये। उन्होंने जंगेखान से पूछा- "खान साहब आप कमाठी मजदूरों का उपयोग क्यों नहीं करते?" आप इन गुलामों को ही अपने पास क्यों रखते हैं?" "राजन अपने तबेले के घोड़ों और बाजार के टट्टुओं में अपने लिए अधिक काम का कौन है? अपना घोड़ा अपने बैल। वैसे ही ये अपने गुलाम हैं। हमारे गुलाम कितना भी बोझ उठा सकते हैं।" "लेकिन खान साहब घोड़े, कुत्ते और इनसान की औलाद में कुछ फर्क होता है कि नहीं?" "लेकिन राजन, ऐसे फालतू विषय पर यानी गुलामों पर आप इतना क्यों सोचते हैं?" कुछ याद करते हुए जंगेखान ने कहा, "हाँ अब समझ में आयी बात। आप तो शायर हैं न?" "यहाँ शायरी का सवाल नहीं है, खान साहब। ये किसी मजबूरी में भगाए गये और भेड़-बकरियों की तरह बेचे गए गुलाम किसी के पुत्र हैं और मुम्बई के बाजार में बिकने वाले गुलाम हमारे हिन्दवी स्वराज्य के ही बच्चे होते हैं। इसीलिए हमारा हृदय पसीजता है।" शम्भूराजा एक पल रुके और दूसरे ही क्षण जंगेखान की राय जाने बिना उन्होंने कविराज को आदेश दिया—"कविराज, जंगेखान को सरकारी खजाने से जितना चाहे उतना धन दीजिए पर कल इन सभी गुलामों की मुक्ति होनी चाहिए।" "जैसी आज्ञा राजन!" कविराज ने गर्दन हिलाई। उन्होंने आगे कहा, "हमारे पिताजी मनुष्य के साथ गुलामों जैसा व्यवहार 338 :: सम्भाजी