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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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शहजादा अकबर की ओर देखकर कवि कलश बोले, "जंजीरे के सिद्दी खैरियत खान और कासिम पक्के हैवान हैं। पैसे की लालच में ये किसी भी व्यक्ति को नोच डालने में संकोच नहीं करेंगे।" "कुछ दिन पहले श्रीबाग और पेण के कुछ अमीर मुसलमान व्यापारियों को भी पकड़कर ले गये। उन्हें उंदेरी के किले में बाँधकर खूब पीटा। हमारे लोग ही नहीं अंग्रेजों के वकीलों ने भी बीच बचाव किया। किन्तु अठारह हजार नकद लेने के बाद ही उन्हें छोड़ा।" शम्भूराजा ने कहा। इसी तरह का एक और कारनामा हब्शियों ने पिछले महीने किया था। उनकी अत्याचारी सेना ने पनवेल से लेकर चौल तक के सारे मराठी प्रदेश को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। उसका बदला लेने के लिए शम्भूराजा ने स्वयं जंजीरे पर आक्रमण किया था। उनके साथ बीस हजार की फौज और छोटी बड़ी कुल तीन सौ नौकाएँ थीं। शिवाजी महाराज के स्वर्गवास का समाचार पाकर सिद्दी खैरियत और सिद्दी कासिम ने पूरे दस दिन तक जंजीरे पर उत्सव मनाया था। अपने साथ अपनी फौज को भी खूब शराब पिलाई थी। यह सोचकर सिद्दी पागल हो उठे थे कि शिवाजी के स्वर्गवास के बाद मराठा शक्ति का अन्त हो गया है और अब उन्हें कोई भी रोक नहीं सकता। किन्तु थोड़े दिनों में शम्भूराजा ने उंदेरी पर आक्रमण करके सिद्दियों का घमंड तोड़ दिया। राजपुरी के पीछे के पहाड़ पर मराठों ने अपनी पाँच हजार की फौज तैनात की थी। ऊपर पहाड़ से नीचे पानी में देखने से पानी में तैरती नावें कुछ विचित्र दिखाई पड़ती थीं। ऐसा लगता था जैसे राजपुरी के दोनों ओर से बच्चों ने कागज की नावें छोड़ रखी हैं। किन्तु वह मराठों की असली सेना थी। शिवाजी महाराज की मृत्यु के केवल एक वर्ष में ही शम्भूराजा उनसे पाँच कदम आगे निकल गये थे। सुसज्ज सेना संगठित करके पश्चिमी तट पर शासन करने वाले और कुछ शतकों से जमे हुए सिद्दियों को उन्होंने ललकारा था। तीन सौ नौकाओं का बेड़ा लेकर शम्भूराजा स्वयं जंजीरे के समुद्र में उतरे थे। सिद्दी खैरियत और कासिम अनेक बार किले के बुर्ज पर आकर खड़े होते और भयभीत नजरों से दूरबीन की सहायता से पानी की ओर देखते। राजपुरी से लेकर मुरुड गाँव के तट पर और वहाँ से पद्मदुर्ग की ओर लगभग एक मील तक देखने पर लगभग सौ नौकाएँ तैरती नजर आती थीं। उनका नेता प्रसिद्ध नाविक दरिया सारंग था। इस दिशा से अनेक बार तोप के गोले आकर जंजीरे से टकराते थे। राजपुरी से आगरदांडा और दीघी तक के परिसर में लगभग सवा सौ नावें खड़ी थीं। सम्भाजी :: 359