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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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श्रृंगारपुर पर आक्रमण किया। इस खबर के मिलते ही सूर्यराव अपनी राजधानी छोड़कर पास के जंगलों में भाग गया। सूर्यराव की गद्दारी से सन्तप्त शिवाजी महाराज ने उनके सिंहासन को पैर की ठोकर से गिरा दिया। संयम का बाँध टूट चुका था। महाराज ने श्रृंगारपुर पर छापा मारा था। सुर्वे की सम्पत्ति जब्त की जा रही थी। तभी छः-सात साल की गोदू कभी झरोखे से तो कभी पर्दे के पीछे से बड़े महाराज को बड़े आदर से, भय‌मिश्रित आदर से देख रही थी। अपने नानाजी का भाग जाना उसे बहुत बुरा लग रहा था। उसके पिता पिलाजी शिर्के बड़े धैर्य के साथ वहीं पर रुके हुए थे। सुर्वे की सम्पत्ति की गिनती हो रही थी। कर्मचारी वहाँ के सोने चाँदी के बड़े बर्तन, सिर तक ऊँचे दीपाधार, नक्काशीदार बड़े बड़े हंडे, कलश आदि सामान बाँधे जा रहे थे। उसी समय महाराज उन्हें देखने के लिए वहाँ आये। चमकते हुए दीपाधार और साफ सुथरे सोने चाँदी के बर्तन देखकर महाराज चौंक गये। उन्होंने कहा, "ऐसी वस्तुएँ राजमहलों में भरी पड़ी मिलती हैं किन्तु ऐसी स्वच्छता, सफाई, इतना सुन्दर रखरखाव, ऐसी सजावट बिना किसी जानकार और समझदार स्त्री की देख-रेख असम्भव है।" "महाराज ! यह जादुई करामात मेरी कन्या येसू की है।" पिलाजी ने निवेदन किया। महाराज दूमरे दालान में प्रविष्ट हुए। तभी नौकरों को हिदायत देती हुई छोटी सी येसू उनको दिखी। वह बड़े आत्मविश्वासपूर्वक खड़ी थी। शीशे के सामान को बाँधते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए, ऊँचे सामानों को कैसे बाँधना चाहिए, ऐसी हिदायतें वह नौकरों को दे रही थी। महाराज धीरे धीरे आगे बढ़े। उन्होंने येसू के मस्तक पर कोमलता से अपना हाथ रखा। उस हँसमुख, उत्साही, प्रसन्न, स्वच्छता और अनुशासन की आग्रही येसू को महाराज ने अपनी बाँहों में भर लिया। उन्होंने पिलाजी से कहा, "पिलाजी राव ! आपके ससुर सूर्यराव पर हमें इतना क्रोध आया था कि सारे श्रृंगारपुर को भस्म कर देने का हमने निश्चय कर लिया था। किन्तु आपकी इस छोटी बच्ची ने हम पर जादू का असर डाला है। यह सारी सम्पदा तुम अपने पास रख लो। हम तुम्हारे राजमहल से केवल एक बहुमूल्य चीज लेकर जाने वाले हैं।" महाराज की बातों से चिन्ताग्रस्त पिलाजी राव को सुखद धक्का लगा। महाराज ने कृतज्ञता के भाव से पिलाजी राव से कहा, "अपने शम्भूराजा के लिए हमें एक अच्छी कन्या की तलाश थी। ऐसी सुन्दर और कर्तव्यकुशल लड़की हमें दूसरी कहाँ मिलेगी ? पिलाजी राव की आँखों में आँसू उमड़ आये। उन्होंने महाराज के पैर पकड़ सम्भाजी · 35