छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलिए। उन्होंने कहा, “महाराज! हम पराजित हैं। उससे भी अधिक हम स्वराज्यद्रोही हैं। आप मेरी बेटी को इतना बड़प्पन क्यों दे रहे हैं? आपके शम्भू के लिए ऐसी बहुत सी लड़कियाँ मिल जाएँगी।” “नहीं पिलाजी राव, घर के किसी बर्तन पर जरा सा दाग लगने पर भी जिसकी जान निकलने लगती है, वही बच्ची कल जब गृहलक्ष्मी बनकर हमारे महल में आयेगी तो उसके चरण स्पर्श से हमारा राजमन्दिर असली मन्दिर के रूप में बदल जाएगा।” उन दो तीन दिनों में बहुत सी घटनाएँ घटीं। शिवाजी महाराज ने येसूबाई और शम्भूराजा का विवाह तो निश्चित किया ही साथ ही पिलाजी राव और उनके घर के संस्कार को इतना पसन्द किया कि महाराज ने अपनी कन्या, नानीबाई उर्फ राजकुँवर की सगाई पिलाजी राव के पुत्र गणेशजी के साथ पक्की कर दी। सूर्यराव के उद्धत स्वभाव और निरंकुश व्यवहार की छाया पिलाजी राव ने अपने ऊपर नहीं पड़ने दी थी। पिलाजी राव के नेतृत्व में ही दूर दराज में बसा यह श्रृंगारपुर महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित विद्यानगरी में परिवर्तित हो गया था। तमाम देशों के बहुत से पंडित, विद्वान, तान्त्रिक, अनेक विद्याशाखाओं के अग्रदूत इस परिसर में अपना मठ बनाकर या गुफाओं में पनाह लेकर विराजमान थे। पिलाजी राव ने केशव पंडित और रघुनाथ पंडित जैसे विद्वानों से अपने बच्चों को पढ़ाया था। किन्तु पढ़ाई में गणेशजी की अपेक्षा येसूबाई की लगन अधिक थी। कर्तव्यपरायण पिलाजी राव ने येसूबाई के दहेज में हीरे मोतियों से भरी बोरियाँ रायगढ़ नहीं भेजी थीं। परन्तु केशव पंडित और रघुनाथ पंडित दोनों बन्धुओं को ससुराल जाती गोद के साथ भेजना नहीं भूले। रायगढ़ में पाठशाला आरम्भ हो गयी। अन्य बच्चों के साथ छोटी येसू और शम्भूराजा एक साथ ही पढ़ रहे थे। अपनी धर्मपत्नी समझने के पहले शम्भूराजा ने येसूबाई को अपनी सहपाठिनी और सहयोगिनी के रूप में मन में बिठा लिया। आज अचानक येसूबाई ने हंसा की बात छेड़ी तो शम्भूराजा कुछ हड़बड़ा गये। येसूबाई का राजमहल और शम्भूराजा के हृदय में कुछ विशिष्ट स्थान था। इसीलिए शम्भूराजा उठ खड़े हुए और बेचैनी से इधर उधर घूमते हुए, हाथ हिलाकर बोले- “युवराज्ञी! आप यह कैसे भूल रही हैं कि हम युवराज हैं। यदि कोई युवती हमारे मन में बैठ गयी तो हम उसके साथ सीधे सीधे विवाह करेंगे और एक रानी के लिए महल बनवाने के लिए रायगढ़ में जगह की कमी है क्या?” “मगर युवराज हंसा अण्णाजी पन्त की कन्या थी।” “किसी की भी होने दो। परन्तु यहाँ तो सुन्दर स्त्रियों का नाम मेरे साथ 36 · सम्भाजी