छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 382, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्षात्र तेज एक शम्भूराजा राजधानी में वापस आ गये। रास्ते में पहाड़ के पास चांभारगढ़ पर एक रात का पड़ाव किया था। वहीं पर उन्हें खोजते हुए गुप्तचर वहाँ आये थे और रात मे ही उन्हें ताजा समाचार सुनाया—'हसनअली खान भिवंडी और कल्याण में भीषण अग्निकांड करके घाट की ओर चला गया। मराठों का समझकर उसने पुर्तगालियो के चालीस गाँवों को आग लगा दी।' शम्भूराजा ने कवि कलश से कहा—"कविराज एक हसनअलीखान चला गया। किन्तु अपने स्वराज्य को कष्ट देने के लिए औरंगजेब ने जगह जगह अनके भूत छोड़ रखे हैं। इस औरंगजेब से महाराष्ट्र किस प्रकार लडता रहेगा और कैसे उसे धूल चटाएगा इस पर विचार करना आवश्यक है। राजधानी में चलकर प्रमुख सहयोगियों से युद्ध के सम्बन्ध में विचार विमर्श करना अति आवश्यक है।" "बिलकुल ठीक, राजन।" "कविराज, मेरे साथ गढ़ नहीं चलो। जल्दी ही दक्षिण कोंकण की ओर निकलो।" "महाराज ?" "कुडाल और डिचाली में बारूद का कार्य किस तरह चल रहा है? खर्च क्या है? और उत्पादन क्या है? इसके अतिरिक्त गोवा की ओर पुर्तगालियों की क्या गतिविधियाँ चल रही हैं? इसका पूरा विवरण हमें दीजिए।" "राजन, ऐसे चलने चलते निकलता हूँ। चौथे पड़ाव के लिए रायगढ़ पर स्वामी के चरणों में उपस्थित होता हूँ।" कवि कलश ने उत्साहित होकर कहा। दूसरे दिन शम्भूराजा रायगढ़ पहुँच गये। महल के द्वार पर महारानी येसूबाई ने सोने की थाली में उनका परिछन किया। महारानी को देखकर शम्भूराजा चमके। उनके पेट में पाँच माह का शिशु पल रहा था। वे उनकी पीताभ कान्ति को देखते रह 380 :: सम्भाजी