छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगये। उस बेडौलपन में भी एक मिठास, एक मनोवांछित छवि आ गयी थी। रात को शयनकक्ष में राजा ने कहा, "कुलदीपक का आगमन हो, ऐमी राजा की ही नहीं सामान्य प्रजा की भी आकांक्षा है। गयगढ़ को उनराधिकारी मिलेगा तो.." "हाँ, कवि भाई जी के पुत्रकामेष्टि यज्ञ को यश मिला है।" "सच है, पगन्तु अपने कविराज द्वारा सुझाया गया वह यज्ञ भी कुछ लोगों के पेट में चुभ रहा था। किन्तु ऐसा यज्ञ तो पुत्रप्राप्ति के लिए महागज दशरथ ने भी किया था।" "मराठों के हिन्दवी स्वराज्य के लिए भी एक गम मिलेगा।" महारानी के भीतर आनन्द का ज्वार उठ गया था। "प्रसूति के लिए कहाँ जाएँगी ?" शम्भुराजा ने अचानक प्रश्न किया। "कहाँ? शृंगारपुर नहीं तो दाभोल गणोजी राजा के यहाँ।" येसूबाई ने बीच में रुकते हुए प्रतिप्रश्न किया - "आपने ऐसा टेढ़ा प्रश्न क्यो किया ?" "कुछ नहीं, महज भाव से पूछ लिया।" "हमारे पिताजी गतवर्ष भगवान को प्यारे हो गये। लेकिन इससे क्या होता है? अपनी बहन की प्रमृति व्यवस्था न कग पाने की लाचारी अभी शिर्के लोगों को नहीं आयी है। गणोजी राजा हर तरह मे समर्थ और समृद्ध हैं।" येम्रुबाई ने अभिमान के साथ कहा। जंजीरे का सेतु अधूरा रह गया था। उसी बीच औरंगजेब के आक्रमण ने अनन्त अड़चनों और कार्यों के पहाड़ खड़े कर दिये थे। शम्भुराजा को बहुत देर तक नींद नहीं आयी। येसूबाई को नींद आ गयी थी और देखते-देखते वे गहरी नींद सो गईं। एक ही शरीर में दो प्राण विश्राम कर रहे थे। शम्भुराजा अपनी पत्नी की ओर बड़े प्यार से देख रहे थे। अचानक राजा को स्मरण हुआ कि सन्ध्या समय अन्दर आते समय महाद्वार पर खंडोजी ने उन्हें एक गुप्त लिफाफा दिया था। अलसाए हुए चिराग के प्रकाश में उन्होंने लिफाफे की हरी गाँठें खोलीं। आरम्भ की दो पंक्तियों पर दृष्टि डालते ही उन्होंने अपनी साँस रोक ली। उनकी आँखें मियाँखान के उस पत्र पर जल्दी जल्दी घूमने लगीं। "शम्भू महाराज, लगता है कि इसके पहले के चार गुप्तपत्र आपके पास तक नहीं पहुँच पाये। हो सकता है कि हमारे गुप्त जासूसों को ममाचार की थैली सहित कैद कर लिया गया हो। अपनी बेटी के लिए बाप का कलेजा किस तरह टूटता है ? इसे आपने मेरे सन्दर्भ में देखा ही है। मेरी दो दुलारी शहजादियों का विवाह केवल सम्भाजी .: 381