छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआपकी कृपा से सम्भव हुआ। महाराज बहुत-बहुत शुक्रिया! आज आपको एक खुशखबरी देते हुए मुझे भी बड़ी खुशी हो रही है। आप भी एक प्यारी-प्यारी बेटी के पिता हुए हैं।" यह समाचार पढ़ते ही शम्भुराजा के सर्वांग से आनन्द की बिजली दौड़ गयी। वह धम्मभ से बिछौने पर बैठ गये। भूपालगढ़ के दिन उन्हें स्मरण हो आये। उस समय समस्याओं से ग्रस्त दुर्गा देवी का चित्र उनकी आँखों के सामने साकार हो गया। शम्भुराजा की आँखों में आनन्दाश्रु भर आए। दूसरे ही क्षण लाडली बेटी का स्मरण करके उनका हृदय भर आया। वे आगे का समाचार पढ़ने लगे—"बेलों में फूल आने से माली खुशी से पागल हो उठता है। आप तो मराठों के बादशाह हैं। आज आपकी राजकन्या औरंगजेब के अहमदनगर के किले में कैद है और वहीं छोटी से बड़ी हो रही है। किसी बात की चिन्ता न करें। आपकी रानी, राणूदीदी और लाडली बेटी की औरंगजेब ने अच्छी व्यवस्था की है। फिर भी पिंजड़ा तो पिंजड़ा ही है, चाहे सोने का हो या लकड़ी का। किन्तु आप चिन्ता न करें। कई जन्मों के लिए आपका शुक्रगुजार यह मियाँखान अभी जिन्दा है। बीमारी की वजह बताकर अहमदनगर किले में ही एक छोटी नौकरी कर ली है। यहाँ यह मियाँखान बादशाह की नहीं, अपनी राजदुलारी शहजादी की सेवा-चाकरी कर रहा है।" शयनगृह में उस रात अपनी बेटी का स्मरण करके राजा के धैर्य का बाँध टूट गया। वे अपना रोना रोक नहीं सके। उनके रोने की आवाज से महारानी येसूबाई भी जग गयीं। पत्र पढ़कर उनका भी मन भर आया। वह भी रोने लगीं। शम्भुराजा संभले। येसूबाई के पेट में भी एक शिशु था। उसे कष्ट न पहुँचे इसलिए वे येसूबाई को समझाने लगे। उन्हें धीरज बँधाने लगे। रानी के कपोलों पर अपनी उँगलियाँ घुमाते-घुमाते बेटी की स्मृति में उनका मन बहुत छोटा होता जा रहा था। प्रातः काल राजाज्ञा हुई। रायगढ़ पर जलेबियों की परातें आने लगीं। बहुत लोगों को आश्चर्य भी हुआ। प्रजा में कानाफूसी होने लगी। खंडो बल्लाल ने शम्भुराजा से पूछा, "महाराज, अभी महारानी प्रसूति के लिए मायके गयी भी नहीं, तब तक ये जलेबियाँ?" "क्यों ?" "नहीं, महाराज को पुत्ररत्न प्राप्त हो ऐसी प्रजा की हार्दिक इच्छा है। हम सब पेड़े चाहते हैं और आप जलेबियाँ बाँट रहे हैं।" ऐसा है खंडोजी, बच्ची की इच्छा हुई तो आज जलेबियाँ। कल पुत्रप्राप्ति के बाद पेड़े तो हैं ही।" इसी प्रकार कुछ कहकर शम्भुराजा ने बात को टाल दिया। 382 :: सम्भाजी