छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदो शम्भूराजा को राजधानी में आये पाँच दिन हो चुके थे परन्तु उनका दर्शन दुर्लभ था। वे न तो दरबार में आते थे और न ही जगदीश्वर के दर्शन के लिए बाहर निकलते थे। उन्होंने अपने महल में स्वयं को बन्द कर लिया था। वे बीमार नहीं थे किन्तु युद्ध नाम के ज्वर ने उन्हें पूरी तरह हैरान कर दिया था। शम्भूराजा के साथ येसाजी कंक, म्हालोजी घोड़पड़े, निलोपन्त पेशवा, प्रह्लाद निराजी, खंडो बल्लाल, यानाजी मोरे जैसे पुराने प्रतिष्ठित लोग और नयी ऊर्जा के वीर सिर से सिर लगाकर बैठे थे। चार दिन किसी प्रकार बीत गये। गुप्त मन्त्रणा अखंडरूप से चलती रही। दुर्गादास राठौर और शाहजादा अकबर का निवास वकीलों के निवास के पास था। वे दिन में कभी-कभी आकर विचार-विमर्श में भाग लेते थे। उनमें केवल दुर्गादास में ही इन कार्यों रुचि दिखाई पड़ती थी। पिछले चार दिनों से शम्भूराजा प्रातःकाल आठ-नौ बजे से विचार गोष्ठी में बैठ जाते थे। वहीं पर दोपहर और रात के भोजन के लिए थालियाँ आ जाती थीं रात बीतने पर मुर्गे की पहली बाँग के साथ ही वे अपना स्थान छोड़ते थे। केवल घंटे दो घंटे की ही नींद किसी प्रकार ले पाते थे। पुनः स्नान करके घंटे भर उनकी पूजा चलती थी। इसके बाद गर्म दूध का प्याला उनके ओठों को लगता था। फिर वे जल्दी में वस्त्र धारण करते थे। निजी कक्ष से सदर की ओर जाते हुए रायप्पा और अन्य सेवक लिवासबन्द बाँधते और रत्नों के आभूषण पहनाते थे। भीतर निजी दरबार में इतना व्यस्त कार्यक्रम चल रहा है, इसका किसी को अनुमान तक न था। लेकिन विचार-विमर्श करते समय अर्जोजी यादव और कान्होजी भांडवलकर जैसे विशेषज्ञों द्वारा बनाये गये मानचित्र एवं मोम की बनी अनेक किलों की प्रतिकृतियाँ सदैव ही रखी रहती थीं। उनका अध्ययन करते हुए, सारी रात मशाल की तरह आँख जलाते सभी रात भर जागते रहते थे। औरंगजेब के भयंकर आक्रमण से शंभूराजा बहुत सावधान हो गये थे। बादशाह की पाँच लाख की फौज और लगभग तीन लाख घुड़सवारों का समुद्र की तरह गरजते हुए स्वराज्य पर चढ़ आना उन्हें अच्छी तरह स्मरण था। इस प्रचण्ड का मुँह मोड़ने, उसे दूसरी ओर घुमा देने के लिए कौन-सा भगीरथ प्रयास किया जाय? इसी की चर्चा हो रही थी। पिछली रात अचानक इस चर्चा में हंबीर मामा अवतरित हुए। उन्हें देखकर नये-पुराने सभी सदस्य आश्चर्यचकित हुए। शम्भूराजा ने आश्चर्य से पूछा- “मामाऽऽ आप यहाँ आयेंगे, ऐसी सम्भावना नहीं थी। आप तो वहाँ मोर्चे पर ... ?” शान्त स्वभाव के हंबीरराव मोहिते हँसते हुए बोले, “शम्भू बेटे, हम बड़े सम्भाजी :: 383