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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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दुर्भिक्ष के संकट को और भी बढ़ाने वाला है।" "खंडोबा!" "जी महाराज!" "इस सम्बन्ध में सेना और प्रजा को सावधान रहने की सूचना जल्दी ही दे दो।" शम्भूराजा ने दरिया सारंग और दौलतखान को जानबूझकर जंजीरे की लड़ाई से वापस बुला लिया था। शम्भूराजा ने कहा, "हमारे समुद्रीतटों पर लगभग सौ वर्षों से पुर्तगालियों का क़ब्जा बना हुआ है। उन्हें उखाड़ फेंकना सरल नहीं है। चौल, थाने, बसई , तारापुर में फिरंगियों के साथ हमारी नोंक-झोंक जारी है। निलोपन्त, फिलहाल आपकी नियुक्ति किसी न किसी बन्दरगाह या खाड़ी के किनारे होगी। बोलिएऽऽ" महाराज, हमारी सेना ने माहिम और तारापुर की पुर्तगाली चौकियों पर पहले ही झटके में कब्जा कर लिया था। उनमें माहिम पुनः फिरंगियों के क़ब्ज़े में चला गया। किन्तु तारापुर को पुनः हमने अपने अधिकार में खींच लिया। चोल और देवदंड क्षेत्र में हमारा आग का खेल चल ही रहा है।" "वाह निलोपन्त आजकल पेशवा होने पर भी आपकी कलम से स्याही गिरने की जगह आपकी तलवार से फिरंगियों का खून बहता है। 'निलोबा आयाऽऽ' सुनते ही फिरंगियों की जहाजें पानी के पेट में बैठ जाती हैं। आपका यह पराक्रम देखने के लिए मोरोपन्त को जीवित रहना चाहिए था।" शम्भूराजा ने गोवा के पास अंजदीप टापू पर तटबन्दी निर्माण के लिए सेना भेजी थी। आवश्यक पत्थर और चूना भी भेजा गया था। उसका स्मरण दिलाते हुए राजा ने पूछा—"कविराज आप डिचौंली से होकर आये हैं। बतायें कि अंजदीप पर किले का निर्माण कार्य कहाँ पहुँचा है?" "निर्माण कार्य आरम्भ होते-होते ही पुर्तगालियों के जहाज वहाँ आ गये। उन्होंने निर्माण का कार्य रोक दिया।" "लेकिन आज तक तो वह जगह मुक्त ही थी। कविराज, आप लोगों की समझ में क्यों नहीं आता कि भविष्य में गोवा के फिरंगियों की छाती पर पाँव जमाने के लिए वह जगह बहुत ही उपयोगी है। "वस्तुतः यही बात उस काँट दी आल्व्होर ने भी अनुभव की है इसीलिए तो उन्होंने तत्काल काम को रोक दिया।" सम्भाजी महाराज विचारमग्न हो गये। फिर वे एक उच्छवास छोड़ते हुए बोले, "सिद्दियों की तरह ही इन फिरंगियों को भी अपाहिज बनाकर छोड़ना चाहिए। गोवा के साथ ही इस वाइसराय को भी पानी में डुबो देना चाहिए। नहीं तो 388 :: सम्भाजी