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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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यह रँगा सियार जल्दी ही उस औरंगजेब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो जाएगा।" इस विचार गोष्ठी में अनेक नये निर्णय लिए गये। घोड़ों की नस्ल सुधारने के लिए सरदारों, थानेदारों, देशमुख और देशपांडे को रुपये दिये गये। औरंगजेब के आक्रमण को किस प्रकार रोका जाय? इस विषय पर शम्भूराजा ने बहुत विस्तार से चर्चा की। येसाजी और हंबीरराव से प्राप्त सूचनाओं पर गम्भीरता से विचार किया। शम्भूराजा सन्तुष्ट दिख रहे थे। उन्होंने कहा- "फिलहाल अपने राज्य में भाईबन्दी में धोखेबाजी घुला पानी स्वच्छ होता दिखाई पड़ रहा है। वैसे तो स्त्रियों के बारे में छोटी-मोटी कहानियाँ गढ़कर बाजार में गप्पें लगाने और अफवाहों को फैलाने में दिमाग की कोई जरूरत नहीं होती। किन्तु औरंगजेब जैसे बलशाली शत्रु और समुद्र सी उफनती उसकी विशाल सेना का मुकाबला करने के लिए पहाड़ जैसी बलवान छाती चाहिए। शेर की तरह साहस चाहिए। माँ भवानी की कृपा और पुण्यवान पिता के आशीर्वाद से हम इस अग्निदाह से अवश्य ही सही-सलामत बाहर निकलेंगे।" बोलते बोलते शम्भूराजा यकायक चुप हो गये। सभा में गाते हुए जैसे कोई सिद्ध गायक अपनी गायनकला में तल्लीन हो जाता है उसी प्रकार युद्ध की योजना बनाते समय शम्भूराजा की स्थिति हो रही थी। वे बोले-"कोई भी किला यदि अजेय रह सकता है तो उसमें संचित गोला बारूद के भंडार और साहसी सैनिकों के बल पर ही। गोले बारूद की आग एक बार बुझ जाये तो भी कोई बात नहीं किन्तु घोर प्रतिकार करने वाले जवानों के सीने की आग कभी ठंडी नहीं पड़नी चाहिए। क्यों हंबीरराव?" "बिलकुली ठीक सम्भाजी राजा।" अचानक शंभूराजा को अपनी दादी जीजामाता का स्मरण हो आया। वे प्रसन्नता से हँसे। पूर्णिमा की ज्योत्स्ना उनके चेहरे पर फैल गयी। उसी समय एक पुरानी बात उनकी स्मृति में उछली। वे भावुक होकर कहने लगे- "किसी किले को जीतने के लिए आक्रमण कैसे करना चाहिए? और उसे किस प्रकार कब्जे में लेना चाहिए? इसकी वीरतापूर्ण कहानियाँ मैंने दादी की गोद में सिर रखकर सुनी हैं। देवगिरी का किला अजेय था। किन्तु हमारे परदादा-लखुजी जाधवराव साहब ने कैसे आक्रमण किया? इसकी कथा दादीजी ने मुझे सुनाई थी। वह मैं आप लोगों को बताऊँ?" "हाँ, हाँ, महाराज अवश्य सुनाइये।" बैठक में चारों ओर से आवाज आयी। "देवगिरी का किला ऊँचाई पर बना है। किले के ऊपरी हिस्से में जाते समय अनेक गुप्त रास्ते बने हैं। ये रास्ते अँधेरे से होकर जाते हैं। बीच में आग और पानी की खंदकें बनाई गयी हैं। यदि किसी ने इस विशालकाय किले पर आक्रमण करने सम्भाजी :: 389