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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 392, कुल 793 में से

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के लिए सोचा भी तो पहले उसे किनारे की तटबन्दी पार करनी पड़ेगी फिर खंदक। यदि किसी तरह खंदक पार करने में कोई सफल हो गया तो फिर उसे ऊपर सरकने में बड़ी कठिनाई होगी। बीच में ही अनेक अन्धे मोड़ और गुप्त रास्ते हैं। यदि इन अँधेरे रास्तों का ज्ञान नहीं है तो कोई भी सेना अधिकारी अपनी फौज के साथ इन्हीं अँधेरे रास्तों से होकर गहरी गुफाओं में जा गिरेगा। या फिर किले के नीचे गिर कर मोक्ष लाभ करेगा। इस तरह के रास्तों को किले के निर्माण के समय ही योजनाबद्ध तरीके से बनाये गया है। ये समस्याएँ आक्रमणकारी के ध्यान में भी नहीं आएँगी।" "यह कैसे ?" हंबीरराव ने बीच में ही प्रश्न किया। "क्योंकि उनकी रचना पैरों के नीचे की जाती थी।" शंभूराजा हँसते हुए कहने लगे—"आगे जाने के लिए पैरों के नीचे काली जमीन नहीं पन्द्रह-सोलह हाथ लम्बी लोहे की चद्दर बिछी है। यह बात किसी के भी ध्यान में नही आ सकती। जब बाहर की तटबन्दी पर कोई आक्रमण होता है तो इस लम्बी फौलादी चादर को तपा दिया जाता है। नीचे लकड़ियाँ जलाने के लिए हवा भी आनी चाहिए दीवार में सुरंगें बना दी गयी थीं। हमारे परदादा किला जीतते हुए उस तपती लौह चादर तक जा पहुँचे थे। उस समय किले के सैनिक उनके परिणाम की कल्पना करके मन ही मन हँसने लगे। "हँसेंगे ही, उस भयानक संकट की उन्हें क्या जानकारी थी?" महारानी येसूबाई बोली। "नहीं, महारानी, हमारे परदादा बड़े बुद्धिमान थे। किला जीतने का संकल्प लेकर वे अन्दर गये थे। अन्दर जाते समय ही वे अपने साथ पानी से भरी हुई बड़ी बड़ी चमड़े की मोटें और डोले ले गये थे। उस तपती चादर पर शीघ्रता से पानी उड़ेल दिया गया और वह तपता तवा बुझ गया। उस अभिमानी अजेय किले ने अपना सिर हमारे परदादा के कदमों में रख दिया।" यह यथार्थ कथा सुनकर सभी लोग दंग रह गये। बैठक में हुई दीर्घकालीन चर्चा का एकबार पुनः मूल्यांकन किया गया। शम्भूराजा ने अन्त में कहा, "सम्भव होगा तो सभी मोर्चों पर आक्रमण होगा। जहाँ सम्भव नहीं होगा वहाँ कुछ समय के लिए युक्तिपूर्वक पीछे हटना हमारी नीति होगी। लाखों की सेना लेकर औरंगजेब आएगा। उसे युक्ति से टालना होगा। रुक गया तो चकमा देंगे। सह्याद्रि की ढाल पेट और पीठ से बाँधकर उस पापी औरंगजेब से हम धर्मयुद्ध लड़ेंगे। "वाहऽ वाहऽ" बैठक के सभी लोगों ने राजा के निर्णय की प्रशंसा की। खंडो बल्लाल, कविकलाश, निलोपन्त एक एक को चेतावनी देते हुए और उन्हें संकल्प का रस पिलाते हुए शंभूराजा ने कहा— "इसलिए कहता हूँ यारो! हमारे कन्धे पर शिवाजी महाराज और जीजामाता 390 :: सम्भाजी

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