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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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इमारत बनाई। इसे कैसे भुलाया जा सकता है?'' ''वजीर जी, ताजमहल जैसी खूबसूरत इमारत बनाने वाले कलाकार के हाथ कितने रक्त से भरे थे? इसकी कोई जानकारी है आपको? शाहजहाँ साहब के उन्हीं हाथों ने शहरयार और अन्य सगे भाइयों की गर्दनें काटी थीं। इतना ही नहीं उन्हीं हाथों ने शहरयार के मासूम बच्चों को क्रूरतापूर्वक मार डाला था।'' बादशाह ने मन का सन्ताप व्यक्त किया। उसने महल में इधर-उधर दृष्टि डाली। असदखान और जुल्फिकार के अतिरिक्त वहाँ कोई और नहीं था। शहरयार की याद के साथ औरंगजेब मन में डर गया। उसे स्मरण हुआ कि दारा, सुजा और मुराद जैसे होनहार भाइयों को उसने किस क्रूरता से मार डाला था। इन स्मृतियों से वह बेचैन हो गया। बादशाह को यह भय सदा बना रहता था कि उसके बच्चे भी राजगद्दी के लिए ऐसा ही खून खराबा करेंगे। इसीलिए शहजादों के साथ भोजन करते समय बादशाह की संशयशील आँखें महल के कोनों में झाँकती रहती थीं। वह इस बात से सावधान बना रहता था कि उसका कोई बेटा छुपकर उसका गला न घोंट जाय। ये सरी पुरानी बातें आलमगीर को नये सिरे से याद आयीं। उसने उदास होकर कहा, ''हम मुगलों के लिए तख्त ही वास्तविक ताज है।'' पाँच माणगाँव से कुछ मील की दूरी पर जंगल में बसा गांगोली गाँव था। गाँव से थोड़ी दूरी पर महारानी येसूबाई के नाना का महल था। वैपूर्णा नामक छोटी नदी के किनारे छोटा किन्तु आकर्षक महल लकड़ियों से बनाया गया था। महल के साथ ही लगा हुआ बैजनाथ का मन्दिर और सामने वाले आँगन के साथ नदी का काला प्रवाह। येसूबाई का यह मायका शम्भूराजा को बहुत पसन्द था। सबसे अधिक तो यह कि इसी पवित्र घर ने राजा को पुत्ररत्न प्रदान किया था। इसलिए पूरा वातावरण ही सुगन्धित और पवित्र लग रहा था। महल के सामने का पहाड़ चढ़ने पर कुछ दूरी पर ही रायगढ़ था। सामने वह किला ऐसा दिखाई पड़ता था जैसे कोई हाथी पैर मोड़कर बैठा हो। महीना भर बालक शाहू को गोद में लेकर, उसकी छोटी-छोटी आँखों की ओर देकर शम्भूराजा रायगढ़ की ओर बार-बार देखते रहे। गांगोली के प्रवास में एक सुखद दिन आया। सन्त तुकोबा के चिरंजीव सम्भाजी ∷ 397