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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"खैर, राजपूताना की मरुभूमि से निकलते समय हमारा.मकसद बहुत बड़ा नहीं था। हमें अपनी एड़ी के नीचे सह्याद्रि के एक चूजे नहीं बल्कि एक चूहे के बच्चे को रगड़कर मारना था। लेकिन यहाँ की आबोहवा कुछ अलग लग रही है। क्यों वजीर! आपको कुछ अन्दाजा लग रहा है?" "गिर जाएगा जहाँपनाह। रामशेज दो दिन में गिर जाएगा-नहीं गया होगा।" "मैं किसी दूसरे किले की बात नहीं कर रहा वजीरे आजम।" बादशाह बीच में रुक गया। साँस लेकर हकलाते हुए बोला-"हमारी जिन्दगी में शक ही हमारा सगा रहा है। आजकल हमें लग रहा है कि इस जहन्मी सम्भाजी, उस धर्मद्रोही आदिलशाह और रात-दिन वेश्याओं के कोठों पर पड़ा रहने वाले हैदराबादी कुतुबशाह के बीच कोई समझौता हो गया है। ऐसी शंका मुझे बार-बार हो रही है।" बादशाह के मुँह से निकली यह बात बहुत भयंकर थी इसलिए बाप-बेटे के लिए कोई प्रतिक्रिया देना सम्भव नहीं था। बादशाह ने जान बूझकर विषय को बदल दिया। कलेजे में एक चुभन होने से उसका मन उदास हो गया। उसने असदखान से पूछा-"हमारे बेवकूफ शहजादे-अकबरशाह की ओर से कोई खबर?" "उनकी और उस सम्भा की दोस्ती बहुत बढ़ रही है। बस इतना ही।" शहजादा अकबर बादशाह के हृदय का एक रिसता घाव था। उसके भीतर का यह गहरा घाव उसे चैन से बैठने नहीं दे रहा था। अपनी प्यारी बेगम दिलरस बानू की गोद में खेलते उस नन्हे मुन्ने बादशाह को वह भूला नहीं था। उसका बड़ा शहजादा सुल्तान विद्रोही चचेरेभाई के साथ बर्बाद हो गया था। आज तो वह कैदखाने की हवा खा रहा था। बचे हुए मुअज्जम, आजम और कामबक्स शहजादों से किसी-न-किसी कारण औरंगजेब रुष्ट था। हृदय से वह अकबरशाह को ही चाहता था। किन्तु उसने नापाक राजपूतों और उस मूर्ख दुर्गादास राठौड़ के पीछे लगकर खुद का माथा फोड़ लिया था। मुगलों के राजतिलक का इतिहास बादशाह को याद आया। वह उदास स्वर में बोला, "आजकल हम मुगलों के उत्तराधिकार का इतिहास युद्ध खून सनी कटारी से लिखा जा रहा है। दिन ऐसे बुरे आये हैं कि कभी-कभी जाती दुश्मन भी दोस्त की तरह नजर आते हैं। वस्तुतः शहजादों की कटार का भय अधिक होता है। हमारे अब्बाजान शाहजहाँ साहब ने अपने पिता हमारे दादा जहाँगीर के विरुद्ध बगावत की थी।" "गुस्ताखी माफ, हजरत।" वजीर ने बीच में टोका। "आपके अब्बाजान ने ताजमहल जैसो सारी दुनिया की सबसे खूबसूरत 396 :: सम्भाजी