छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“जुल्फिकार बीजापुर के सर्जाखान की ओर से कोई समाचार?” “अभी तक नहीं, जहाँपनाह।” बादशाह की मुद्रा कठोर हो गयी। उसकी भूरी पुतलियाँ तेजगति से नाचने लगी। वह गुर्राते हुए बोला, “जुल्फिकार!” “हजरत?” “लोग कितने पागल रहते हैं?” कुछ उदास और कुत्सित स्वर में बादशाह बोला, “हमने उस बेवकूफ सर्जाखान से वादा किया था कि हम मराठों का जितना इलाका जीतेंगे उसे बीजापुर की झोली में डाल देंगे। वह इस काफिर बच्चे के नामोनिशान मिटाने में हमारी मदद करे। उससे बस इतनी ही हमारी अपेक्षा थी। फिर भी उस घमंडी सर्जाखान ने हमारी ओर देखा नहीं।” जुल्फिकारखान ने उद्वेग के साथ कहा, “जहाँपनाह, वह आदिलशाह सिकन्दर चौदह पन्द्रह वर्ष का बछेड़ा है। उसे अभी क्या अकल है?” “परन्तु सर्जाखान जैसा अनुभवी सरदार ऐसी लापरवाही करे, यह दुख की बात हैं।” “उसने खत पहुँचने की सूचना भी नहीं दी?” “नहीं हजरत!” खान घबराकर बोला। बादशाह खिन्न दिखाई पड़ा। उसने अपनी सफेद मुलायम दाढ़ी पर बायाँ हाथ फेरा। दाहिने हाथ की जपमाला को आँखों के समीप ले जाते हुए कुरान की एक पंक्ति का ध्यान किया। वह कड़वाहट के स्वर में बोला, “ये बीजापुर और गोलकुंडा के शिया मुसलमान सुधरने वाले नहीं हैं। सर्जाखान के साथ सभी बीजापुर वालों को उस सम्भाजी से मित्रता रखनी है। गोलकुंडा का मुख्य दीवान यादण्णा तो अत्यन्त चतुर, धूर्त और उतना बदमाश ब्राह्मण है। हम सोमनाथ से लेकर यहाँ तक हिन्दुओं के मन्दिर ध्वस्त करते आये हैं। मैंने हुक्म दिया था कि मेरे बुरहानपुर पहुँचने से पहले वहाँ के सारे मन्दिर ध्वस्त कर दिये जायें। मेरे हुक्म की तामील की गयी। हैदराबाद के मुसलमानी इलाकों में क्या हो रहा है? वजीरे आजम आपको इसका कुछ पता है?” “हजरत?” “वह कुतुबशाह का काफिर दीवान यादण्णा हिन्दुओं के बड़े-बड़े मन्दिर बना रहा है।” “तोबा! तोबा! हुजूर ” जुल्फिकारखान ने अपने गालों पर हल्की चपत लगाते हुए अपना असन्तोष व्यक्त किया। बादशाह ने जुल्फिकारखान और वजीर असदखान इन पिता-पुत्र पर नजर डाली। अपनी भूरी आँखों को सिकोड़ते हुए औरंगजेब ने एक साँस ली और बोला, सम्भाजी :: 395