छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलेकर जा रहा हूँ।" "कितना समय लगेगा?" "सुबह की नमाज के बाद बम लगाना शुरू करूँगा और किला जीतकर दोपहर की नमाज के लिए किले पर ही चादर बिछाऊँगा।" "वाहऽ, बहुत खूब।" बादशाह बहुत सन्तुष्ट दिख रहा था। "हमें इस सम्भा को पराजित करके गोलकुंडा और बीजापुर के राज्य नष्ट करने हैं। केवल आठ-महीने के भीतर पूरे दक्खन पर क़ब्ज़ा कर लेना है। एक वर्ष के अन्दर हजरत बाबा चिस्ती के दरबार में उत्तर की ओर अजमेर पहुँचना है।" औरंगजेब ने सूचित कर दिया। फिरोजजंग उस दिन जल्दी ही औरंगाबाद से बाहर निकल पड़ा। उस समय बादशाह बहुत प्रसन्न था। उसे विश्वास था कि रामशेज के बाद दो-चार दिन में मराठों का कोई न कोई किला मिट्टी में मिला दिया जाएगा। किन्तु दिनों के बाद बादशाह को दक्षिण की हवा का भी उसे अनुभव होने लगा। औरंगजेब की गर्मी बढ़ने लगी। मूँछों पर ताव देकर शेखी बघारते हुए रामशेज की ओर निकले फिरोजजंग के साथ कासिमखान, शुभकर्ण बुंदेला, पीर गुलाम, मुहम्मद खलील, राव दलपत बुंदेला जैसे अनेक बहादुर सरदार थे। औरंगाबाद में खबरें आ रही थीं कि प्रचंड तोपखाना और गोला-बारूद लेकर फिरोजजंग ने पहली ही मुठभेड़ में रामशेज को चारों ओर से घेर लिया। चार असदखान अपने मालिक को धीरे-धीरे बता रहा था—"बस! किब्लाए-आलम ! ऐसा लगता है कि खुशखबरी यहाँ तक पहुँचने में शायद कुछ देर हो गयी है। नहीं तो अब तक तो किला दम तोड़ दिया होता।" "वजीरे आजम, किसी पर भी विश्वास करने की मूर्खता हम कभी नहीं करते।" बादशाह ने असदखान की ओर क्रोध से देखा। उस अनुभवी सेनानी के पसीने छूट गये। ऊँचा, सुन्दर, घुँघराले बालों वाला जुल्फिकारखान बादशाह के सामने आकर खड़ा हो गया। अपने मौसरे भाई की ओर देखकर बादशाह ने पूछा— 394 :: सम्भाजी