छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइच्छा है। येसूबाई की काजलभरी आँखों में आँसू छिप नहीं पाये। सभी वरिष्ठों को नमन करके येसूबाई शीघ्रता से पालकी में बैठ गयीं। हाथ की लाठियों का सहारा लेकर कहार चल पड़े। दूर जाती पालकियों को शम्भुराजा आँखभर निहारते रहे। छोटी भवानी महीन पर्दा बगल हटाकर पिता की ओर हाथ हिला रही थीं। गणोजी शिर्के ने अपनी बहन की प्रसूति के लिए ले आने के लिए पालकी आदि नहीं भेजी थी। उल्टे एक ऐसा पत्र भेजा था जिसके एक- एक शब्द छुरी के नोक की तरह शम्भुराजा के कानों को छेद रहे थे—'येसू प्रसूति के लिए आने वाली हो, इसके लिए यहाँ से पालकी नहीं भेज रहा हूँ। तुम भोसलों ने हम शिर्के लोगों के लिए छोड़ा ही क्या है ? हमारे वतन को लूटा, हमे भिखारी बना दिया। फिर भी तुम प्रसूति के लिए अपनी पालकी से यहाँ आ जाना। किन्तु आते समय अपने मक्कार ससुर के किये गए वादे के अनुसार हमारे वतन के मुहर लगे कागजात साथ लाना न भूलना।' महारानी की पालकी किले से नीचे उतर रही थी। रानी के बिना महाराज को सूना-सूना लग रहा था। उस समय बिदा लेती हुई छोटी भवानी का चेहरा बार-बार उनके सामने आ रहा था। उस भवानी से एक वर्ष छोटी बेटी भी उन्हें स्मरण हो रही थी। उन्हें याद आने लगीं अहमदनगर के किले में, शत्रु के कड़े पहरे में कैद, अपने छत्रपति पिता से मिलने के लिए आतुर वे छोटी छोटी आँखें। राजा का अन्तर्मन भीतर ही भीतर चीत्कार कर रहा था। "महाराज मैं चलूँ क्या ?" हंबीरराव ने जोर से पूछा। "अँ- ? हाँ" सँभलते हुए शम्भुराजा ने हंबीरराव का हाथ पकड़ा वे साग्रह कहने लगे—"हंबीरराव हमारे हृदय के छोटे से टुकड़े के लिए कुछ कीजिए। कृपया इसे किसी राजा का आदेश न समझें। पर यह जिसे अभी तक देखा तक नहीं उस छोटे बच्चे को चूमने के लिए तरस रहे एक पिता की प्रार्थना अवश्य है। "मराठों के गंडस्थल का मतलब है, उनके शैतानी किले। एक के बाद एक किला जीतते जाओ। ऐसा करते-करते सिर्फ छः महीने में पूरा दक्खन जीत लेंगे।" "जैसा आपका हुक्म, हजरत !" शहाबुद्दीन फिरोजजंग ने अपने राजा के सामने गर्दन झुकाई। वह तूरानी जाति का आबदार आँखों वाला वह भयंकर योद्धा .सरदार था। "किस किले से शुरुआत करोगे, फिरोजजंग ?" "रामशेज से।" "रामशेज ?" "हाँ, यह नासिक से छः- सात मील पर है। पैंतीस-चालीस हजार की फौज सम्भाजी :: 393