छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहमारे चाचा एकोजी राजा हमारी सहायता के लिए आएँगे?" "इसका भरोसा कौन दिला सकता है?" दुविधा में पड़े हरजी ने प्रतिप्रश्न किया। "आपने उनकी सहायता माँगी है क्या?" "हाँ, उम्र से पिताजी के समान, रिश्ते में मेरे चाचा हैं। उनके पास दक्षिण की मिट्टी का जन्म भर का अनुभव है। सम्भव हुआ तो उनका लाभ अवश्य उठाएँगे। स्वामी जी का कहना है-'मराठियों को एकत्र करो, महाराष्ट्र धर्म की वृद्धि करो'। वैसे शम्भूराजा और हरजी के मन में विश्वास नहीं था। वे शिवाजी महाराज के कर्नाटक आक्रमण के समय मिलने के लिए आये थे। किन्तु रातभर में ही नदी पार करके पीछे हट गये। वाणावर में बादल छाए हुए थे। उस दिन दोपहर के बाद गर्मी बहुत बढ़ गयी थी। शम्भूराजा, कवि कलश, हरजी और वहाँ इकट्ठी पचीस हजार सेना के सामने अपने उद्देश्य को बताने लगे। वहाँ फौजी डेरे में मराठा, कुतुबशाही सैनिक और कन्नड़ के प्रमुख सरदार बैठे थे। एक दो दिन में ही त्रिचनापल्ली तक जाना था और कावेरी का समृद्ध क्षेत्र लूटना था। ऐसा गुप्त रूप से निश्चित किया जा रहा था। बसप्पा नाइक ने शम्भूराजा से कहा, "विगत कुछ वर्षों में चिक्कदेव की शक्ति दस गुना बढ़ गयी है। उसकी राजधानी मैसूर पर आक्रमण करना कोई आसान काम नहीं है।" "तुम्हारी बात सच है बसप्पा। एकोजी राजा ने बैंगलौर की चालीस वर्ष पुरानी चौकी को तंजौर स्थानान्तरित किया और सारी गड़बड़ी शुरू हुई। जब तक मराठों ने बैंगलौर में पाँव जमा रखा था तब तक मैसूर पर उनकी बड़ी दहशत थी।" शिविर में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। मैसूर पर आक्रमण करने के स्थान पर त्रिचनापल्ली की ओर से आक्रमण किया जाये। बाघ को जंगल से बाहर निकालकर फिर उसकी हत्या की जाये। ये बातें चल ही रही थीं कि एक खबर आयी-"पन्द्रह हजार की फौज लेकर चिक्कदेव राजा स्वयं हमारे ऊपर आक्रमण करने आ रहा है। शाम तक दोनों सेनाएँ आपस में भिड़ जाएँगी।" यह खबर सुनकर शम्भूराजा गम्भीर हो गये। उन्होंने कहा- "इसका मतलब यह हुआ कि चिक्कदेव बड़ा खेल खेल रहा है। हम सावधान हों, इससे पहले ही उसने आक्रमण करने का निश्चय किया।" अपनी सेना को तत्काल तैयार करना, आसपास की पहाड़ियों की आड़ लेकर, लड़ाई को जारी रखना महत्त्वपूर्ण और आवश्यक था। मैसूर की सेना संगठित और बलशाली है। इसकी जानकारी सभी को हो गयी थी। उस रात अपनी सेना को अर्ध चन्द्राकार बनाकर चिक्कदेव तैयार हो गया। 402 :: सम्भाजी