भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 41

रिश्ते आदि को समझाने का मैंने बहुत प्रयास किया। मैंने यह भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “तुम्हारे इस पागलपन का मुझ पर कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है।" मेरा एक घूँसा उसके मुँह पर लगा। उसके दाँतों से खून टपकने लगा। उसके होंठ का एक कोना सृज गया। मेरे स्पष्ट अस्वीकार से वह दुखी और घायल हो गयी। हमारे महल से बाहर निकलते समय उसकी लाल लाल आँखों में आँसू टपक रहे थे। मुझे देकर आँखें नचाते हुए उसने केवल इतना कहा, “राजा तुम्हारी 'हाँ' का मैं सिर्फ तीन दिन प्रतीक्षा करूँगी। इसके बाद चौथे दिन आप मेरा शव देखेंगे।" हमारे महल से हंसा तुरन्त बाहर निकली। उसी समय पन्त काका उसे ढूँढ़ते हुए आये और अस्त व्यस्त वस्त्रों में मेरे दरवाजे से उसे निकलते हुए देखा। किन्तु अपने लोगों को हर कठिनाई से बचाने के लिए संकल्पित मेरा मन किसे दिखाई पड़ता ? येसू रानी इस घटना को मैं किस मुँह से तुम्हें, पिताजी को या पन्त काका को सुनाता ? इसके अतिरिक्त भविष्य में ऐसा कुछ घटित होगा, इसकी कल्पना मुझे नहीं थी। चार पाँच दिन बाद लोगों ने पाचाड़ के एक कुएँ में हंसा के शव को देखा। मैंने भी यह खबर सुनी। मेरी तो बोलती ही बन्द हो गयी। जवानी की बेहोशी में, प्रेम के पागलपन में हंसा जैसी बहू इतनी सरलता से चली गयी। किन्तु जो अपराध हमारे हाथ से हुआ ही नहीं उस अपराध का लांछन हमारे कलेजे पर लगाने और बदनामी की आग में जलाने के लिए यह दुनिया हमारी कल्पित प्रेम कहानी को गढ़ती बैठी है और आगे भी गढ़ती रहेगी। पाँच शम्भूराजा ने रात का भोजन समाप्त किया। शयनकक्ष में जाने से पहले उन्होंने येसूबाई से सहज ही पूछा, "फिर क्या करना होगा गोदू का?" "कहाँ जाएगी बेचारी ?" येसूबाई ने कहा, "उसके तो न रही ससुराल और न रहा मायका।" "यहाँ पर बहुत से लोग शरण लिए हैं। दास-दासी महल में रहते हैं। वह भी उन्हीं के साथ रह लेगी।" वाड़कर का घर महाड़ के समीप था। वैसे वहाँ हर प्रकार की सुविधा थी। किन्तु गोदू के लिए वहाँ की दुनिया समाप्त हो चुकी थी उसके ससुर और पति किले में बन्दी होकर सजा भोग रहे थे। गोदू जब घबराई हुई शम्भूराजा के महल में सम्भाजी :: 39