छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 42, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयी थी तभी येसूबाई ने उसकी पीठ पर अपना कोमल हाथ रख दिया था। इतना बड़ा राजमहल छत से लटकती बड़ी-बड़ी झूमरें, कमर तक ऊँचे दीपाधार। यह महल गोदू को गन्धर्वनगरी के महल जैसा लगा था। येसूबाई के महल के पीछे उनकी खास दासियों के कमरे थे। उसी में गोदू की व्यवस्था की गयी थी। किन्तु महल में आने के बाद से ही वह येसूबाई की छाया बन गयी थी। युवराज्ञी रसोईघर में, आँगन में, तुलसी वृन्दावन के पास, समीप के बगीचे में जहाँ कहीं भी हों, गोदू हर समय उनके साथ रहती थी। भगवान की पूजा के लिए फूल सजाकर रखना हो, दूर्वादल को साफ-सुथरा करके रखना हो या दीप जलाना हो, या जहाँ कहीं भी ऐसी आवश्यकता हो युवराज्ञी को गोंदू की ही याद आती थी। गोदू भी सदैव उत्साह से तैयार रहती थी। गोदू जवाकुसुम के बड़े फूल जैसी हँसमुख और तेजस्वी थी। येसूबाई की सौत दुर्गादेवी को भी गोदू से प्यार हो गया था। राजमहल में हर जगह गोदू का आना जाना बढ़ गया था। अनेक वर्षों से महल में काम करने वाली दासियाँ और साफ-सफाई करने वाली नौकरानियाँ गोदू को शक और ईर्ष्या की दृष्टि से देखने लगी थीं। उनका मानना था- "ये गोदू बहुत साहसी और षड्यन्त्रकारी दिखती है। वे गरीब इसके ससुर और पति शम्भुराजा पर आरोप लगाने गये थे और कैदखाने में सड़ रहे हैं। और यह औरत घुस गयी युवराज के महल में। युवराज पर तो पहले ही इसका जादू चल गया है। पर यह औरत इतनी होशियार है कि येसूबाई के हृदय में भी अपनी जगह बना ली है। पता नहीं किसी से यह सब कैसे हो पाता है?" युवराज ने दोपहर को.एक बार फिर पूछा, "येसू! क्या करना है गोदू का?" "कितना खर्च होता है उसके पेट के लिए? रहने दो बेचारी को यहीं पर। हमें भी उससे सहायता मिलती है।" "येसूबाई आपका हृदय बहुत बड़ा है। एकदम आसमान जैसा। परन्तु लोगों की जबान में जहरीले काँटे होते हैं। उनके भीतर का जहर जबान से टपके बिना नहीं रहता। फिर सामने चाहे राजा हो या रंक।" कुछ और दिन इसी तरह बीते। एक दिन राहुजी सोमनाथ के हाथ एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण थैली लगी। वाड़कर पिता पुत्र ने बहादुर गड़की और औरंगजेब के दूध भाई बहादुर खान कोकल्ताश को एक गुप्त सन्देश भेजकर कहा था- "जैसे पहले हमारी बात हुई है उसके अनुसार हमारी सहायता कीजिए। हमें मुक्त कराकर शाही सेवा का अवसर दीजिए। अन्ततः वाड़कर का भंडा फूट गया। 'धोखेबाज कैदी' के रूप में उन्हें लिंगाणा की काल कोठरी में भेज दिया गया। इस बात से गोदू की भूमिका दुनिया के सामने आ गयी। सभी को विश्वास हो गया कि अपने महाराज पर जो संकट 40 . : सम्भाजी