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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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आया था वह गोदू की बहादुरी से ही टला। इस सच्चाई का पता लगने पर युवराज और युवराज्ञी ने गोदू की बड़ी प्रशंसा की। येसूबाई ने कहा, "गोदू तू दिल की इतनी नेक और पाक है कि क्या कहूँ? तुमने अपनी ससुराल का सुख छोड़कर मराठों के राजा की जान बचाई।" "युवराज्ञी ! शिवाजी महाराज हम गरीबों के भगवान हैं।" भावना से अभिभूत गोदू ने अपने साहस के रहस्य को स्पष्ट कर दिया। येसूबाई ने शम्भूराजा की ओर नजर घुमाते हुए कहा- "युवराज ! इस लड़की को भगाकर लाने का आरोप इसके परिजनों ने न लगाया होता तो आज इसकी बहादुरी का स्मरण करके महाराज ने इसके सम्मान में रायगढ़ पर आनन्द यात्रा निकाली होती।" दिन बीत रहे थे। अपने सम्बन्धियों के राजद्रोही होने का धक्का अण्णाजी पन्त को भी लगा था। उन्होंने गोदू को अपने घर ले जाने का पुनः आग्रह किया। किन्तु गोदू के दृढ़ निश्चय के सामने किसी की कुछ न चली। बीच में एक बार शम्भूराजा की बहन राणूबाई आक्का साहेब वाई से आयीं। वे अपने छोटे भाई के घर पर ठहरी थीं। उन्हें भी गोदू बहुत अच्छी लगी। किन्तु अपनी ससुराल वापस जाने हुए उन्होंने येसूबाई के कान में धीरे से कहा, "लड़की नक्षत्र जैसी है। गुणवान है। परन्तु जो भी हो है तो पराये घर की। उस पर भी इतनी स्वस्थ और सुन्दर। तुम किसका किसका मुँह बन्द करोगी, येसू !" आक्काबाई साहेब के विचार से धीरे धीरे येसूबाई भी सहमत होने लगीं। एक दिन शम्भूराजा की उपस्थित में येसूबाई ने बात छेड़ी-"गोदू तेरे घर गृहस्थी का क्या होगा?" "क्या करना है युवराज्ञी साहेब? पति स्वराज्य द्रोही हो गया, उसे जिन्दगी भर कैद काटना है। वह धोखेबाज जिन्दा रहे या मर जाय मेरे लिए बराबर है। अब उसका नाम भी जबान पर क्यों लाना ?" "फिर से शादी करो। हम लोग शादी के सारे खर्च, दहेज आदि की व्यवस्था करेंगे।" "शादी ! शादी करनी हो तो बस एक से ही।" गोदू स्वप्न देखती-सी बोली। "कौन है वह ?" गोदू की नजर यकायक शम्भूराजा के ऊपर से उड़ती हुई खिड़की के रास्ते आसमान पर पहुँच गयी। आकाश में उसने एक सफेद बादल का गुच्छा देखा। एक लम्बी और गहरी साँस छोड़ते हुए वह चुपचाप बैठी रही। शम्भूराजा ने बड़े स्नेह से पूछा, "किसी के प्रेम-व्रेम में फँस गयी है क्या गोदू?" युवराज के प्रश्न पर गोदू ने न हाँ कहा न ना। वह चुपचाप वैसे ही बैठी रही। सम्भाजी :: 41