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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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किया। आजकल उस पाषाणी किले पर मदुरेकर चोक्कनाथ नायक अपनी मदुरई छोड़कर स्थायी रूप से रह रहा था। वह इस समय का अतिशय दुर्बल और शक्तिहीन राजा था। वैसे मदुरा सम्पन्न नगरी थी, किन्तु उसका कुछ हिस्सा मैसूर के चिक्कदेव राजा ने, कुछ हिस्सा एकोजी राजा ने, कुछ हिस्सा हरजी राजा ने अपने कब्जे में कर लिया था। आजकल चोक्कनाथ नायक चिक्कदेव राजा की कृपा पर दिन काट रहा है। त्रिचनापल्ली नगरी में और ऊपर किले पर मदुरेकर की सेना नाममात्र की थी। वहाँ की सारी फौज चिक्कदेव की थी। पहाड़ी किले पर चिक्कदेव राजा के अनेक कुशल गोलन्दाज थे। उनकी निश्चित संख्या का पता किसी को नहीं था। किन्तु नगर में ऐसी चर्चा होती थी कि वह सेना बहुत शक्तिशाली है। हुक्केरीकर बसप्पा नाइक शम्भूराजा की क्रुद्ध और उद्विग्न मुद्रा को बार-बार देख रहा था। उसने बड़े उत्साह से कहा, "शम्भू महाराज, वाणावर की लड़ाई में हमारी फौज ने भी पराजय स्वीकार की है। इसका यह मतलब नहीं है कि हम डर गये हैं या हार गये हैं। वहाँ हमारे डेढ़ हजार सैनिक शहीद हुए। किन्तु आप चिन्ता न करें। चार-आठ दिनों में हमारी पाँच हजार की सेना आपके चरणों की सेवा में पहुँच जाएगी।" "हुक्केरीकर लड़ाई के लिए आप बहुत उत्सुक दिखाई पड़ रहे हैं।" "क्या करें चाचा साहब?" बसप्पा ने हँसते हुए कहा। "जब तक आपके राजा हैं तभी तक उस उन्मत्त चिक्कदेव को हम ललकार सकते हैं। उनके चले जाने पर चिक्कदेव हमें निगले बिना नहीं रहेगा।" शम्भूराजा ने एकोजी राजा के तंजौर और हरजी राजा की जिंजी से अधिक से अधिक गोला- बारूद मँगवाया। विचार-विमर्श आरम्भ होने के पहले ही शम्भूराजा ने कवि कलश से कहा, "आज ही गोलकुंडा को दूत भेजिए। कुतुबशाह की नयी पाँच हजार सेना दस-पन्द्रह दिन में यहाँ पहुँच जानी चाहिए।" बातचीत समाप्त करते हुए शम्भूराजा ने कहा, "अपने घाव अच्छे होने के पहले शत्रु को घायल करना है।" नौ शम्भूराजा के उठने से पहले वहाँ पहुँचना और उनकी सेवा में खड़ा रहना, रायप्पा का जीवनभर का नियम था। परन्तु उस दिन रायप्पा को ही शम्भूराजा के दूसरे सेवक जगाने के लिए आये। उठने में विलम्ब हो गया, ऐसा सोचकर रायप्पा तुरन्त उठकर 410 :: सम्भाजी