छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंखड़ा हो गया। आँखें मलते हुए बाहर देखा तो सुबह होने को आयी थी। वह वैसे ही शीघ्रता से राजा के पास पहुँचा। शम्भूराजा की आँखें लाल दिख रही थीं। सम्भवतः वे रातभर सोये नहीं थे। उन्होंने रायप्पा को तत्काल आदेश दिया— “रायप्पा अपने सिपाहियों को लेकर आसपास के गाँवों में जाओ। हमें अधिक से अधिक चमारों की आवश्यकता है।” “जी सरकार।” सेना के लोग हड़बड़ा गये। कविराज की समझ में भी कुछ नहीं आया। दक्षिण के आक्रमण के लिए निकलते समय येसूबाई ने स्वयं इस बात की निगरानी की थी कि अपनी सेना के बहादुर जवानों के पास जूते-चप्पल हैं या नहीं? रायगढ़वाड़ी में इसके लिए चर्मोद्योग का एक कारखाना ही था। राजा की आज्ञा के अनुसार आस-पास के गाँवों से अनेक चमार एकत्र हो गये। फिर शम्भूराजा ने भैंस, बैल, हाथी जिसका भी मिले चमड़ा जमा करने का आदेश दिया। चमड़े को अच्छी तरह कमाकर अच्छे जूते बनाने की आज्ञा सभी चर्मकारों को दी गयी। जोत्याजी और कविराज को अलग उत्तरदायित्व सौंपा गया। कावेरी नदी के दोनों किनारों पर जितने भी मछुआरे थे उन्हें सभी छोटी-बड़ी नौकाओं को एक साथ ले आने का आदेश दिया गया। कुछ दिनों के लिए ये सारी नावें किराये पर ले ली गयीं। लगभग एक हजार नौकाएँ उस विशाल नदी में एक कतार में खड़ी हो गयीं। वर्षा का मौसम जैसे समीप आया, शम्भूराजा शीघ्रता करने लगे। उनके भीतर एक जुझारू युद्धवीर अधीर हो रहा था। उस सेनानायक के कन्धे उचकने लगे। हरजी महाड़िक भी राजा का संकल्प पूरा करने के लिए अपना खून-पसीना एक कर रहे थे। एक बार कावेरी में यदि बाढ़ आ गयी तो राजा की सारी योजना भी डूब जाएगी। कम से कम दो महीने तक यह नदी पार नहीं उतरने देगी। कोई साहसी व्यक्ति इसे पार कर भी ले, किन्तु भारी सामान और घोड़ों का उस पार ले जाना असम्भव था। इसी बीच कविराज ने तीन सौ बहादुर सवारों का दल छाँटकर उन्हें तीरंदाजी का अभ्यास कराना आरम्भ किया। वे बाँस और बेंत के बाणों से अभ्यास करते थे। प्रतिदिन सुबह-शाम अभ्यास होता था। किन्तु चिक्कदेव जैसे बाण मराठा फौज के पास नहीं थे। सभी को विश्वास था कि ठीक समय पर शम्भूराजा कहीं न कहीं से सामान उपलब्ध कराएँगे। तंजौर, जिंजी, गोलकुंडा और इक्केरी से नयी सेनाएँ आ गयी थीं। रायगढ़ से आये लोगों और घोड़ों में गुरूर चढ़ रहा था। घोड़े और मनुष्य दोनों ललकारने लगे। सेना में खबर फैली कि आने वाले एक-दो दिन में शम्भूराजा मछली के बड़े शिकार के लिए निकलने वाले हैं। आखिर वह सुबह आयी। कावेरी की धारा में सवेरे-सवेरे हजारों नावें कतार में खड़ी थीं। उनकी काली सम्भाजी :: 411