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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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में चले गये। बादशाह औरंगजेब को अपनी प्रचंड सेना के साथ दक्षिण में आये चौदह- पन्द्रह महीने बीत चुके थे। उसे अभी भी अपेक्षा के अनुसार कोई सफलता नहीं मिली थी। इसलिए वह बहुत निराश था। इसके विपरीत शम्भूराजा, हंबीरराव, मानाजी, रूपा जी, निलोपन्त आदि ने महाराष्ट्र में मुगल सत्ता को नष्ट करना आरम्भ कर दिया था। शम्भूराजा ने राजा राम सिंह के सम्बन्ध में कविराज से पूछा- "कविराज, इस अम्बर नरेश से आगरा दौरे के समय हमारी भेंट हुई थी। आप भी उसे पहचानते हैं। कैसा लगता है, वह आदमी आपको?" "राज्य के कार्यों की अपेक्षा उन्हें शिकार का अधिक शौक है।" "फिर भी वे मिर्जा राजा के पुत्र हैं। मिर्जा राजा को औरंगजेब ने बुढ़ापे में कष्ट दिया था। राम सिंह का भी बार-बार अपमान किया है। हमारे आह्वान से यदि वे खड़े हो जाएँ तो अच्छा होगा। कविराज, कुछ करना चाहिए।" राजा राम सिंह द्वारा भेजे गये पहले के पत्र को शम्भूराजा ने कविराज से मँगवा लिया। उन्होंने तत्काल कवि कलश को पत्र लिखने के लिए कहा और स्वयं पत्र संस्कृत भाषा में लिखवाने लगे- 'राजाधिराज अम्बर नरेश राजा राम सिंह को सादर प्रणाम। अपने हिन्दवी स्वराज्य में हमने शहजादा अकबर को आश्रय दिया है। इस सम्बन्ध में सन्तोष व्यक्त करने वाला आपका पत्र मिला। आप सभी हिन्दू हैं और सभी को मिलकर सभी के भले के लिए कुछ करना चाहिए। आपका यह विचार हमारे मन को बहुत भला लगा। किन्तु हम औरंगजेब का विरोध न करके उसकी हुकूमत को स्वीकार करें, आपका यह सुझाव एक राजपूत को शोभा नहीं देता। बादशाह का मांडलिक बनने का प्रस्ताव किसी भी स्वाभिमानी मराठा को स्वीकार न होगा। शिवाजी के पुत्र के लिए तो इसका प्रश्न ही नहीं उठता। आपके पुत्र कृष्ण सिंह को औरंगजेब ने किम निर्दयता से मार डाला? यह बताने की आवश्यकता नहीं है। परन्तु यदि धर्म की रक्षा और विकास के लिए सभी हिन्दुओं को संगठित करने का उद्देश्य है तो आप जैसे अनुभवी लोगों को इस कार्य के लिए आगे बढ़ना चाहिए। उस दुष्ट औरंगजेब को ऐसा लगने लगा है कि हम हिन्दू तत्व शून्य और दुर्बल हैं। हममें अपने देश और धर्म के प्रति कोई अभिमान नहीं है। बादशाह का यह बर्ताव हमें सह्य नहीं है। हम क्षत्रिय हैं। अपनी धार्मिक भावना और संस्कृति का अपमान हमारा क्षात्र तेज सहन नहीं करेगा। आप अनुभव और उम्र में बड़े हैं। हम अभी नये अनुभवहीन हैं। आपके धर्माभिमान और शौर्य की बातें मैंने सुनी हैं। आप सप्तांग-राज्य सम्पन्न हैं। थोड़ा 418 :: सम्भाजी