छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाहस दिखायें। उस नीच यवन के अहंकार को मिटाने में हमारी सहायता करें। फिर देखें कि हम किस तरह का दिव्य पराक्रम करते हैं। इस संकट के समय में आप जैसा बलशाली और विवेकवान राजा शान्त कैसे बैठ सकता है? हमें इसी का आश्चर्य हो रहा है। हम अकबर और दुर्गादास को गुजरात के रास्ते उत्तर की ओर भेजने की सोच रहे हैं। हमारी धैर्य और साहस की वृत्ति को आप भी प्रोत्साहित करें। वह पठानों का बादशाह ईरान नरेश अब्बास भी अकबर की सहायता अवश्य करेगा। उसने ऐसा वचन दिया है। कल की यदि अकबर को गद्दी मिली तो उसमें सभी को लाभ होगा। हमारे मन्त्री कवि कलश और जनार्दन पंडित तो आपको अलग से पत्र लिखेंगे ही।' ग्यारह बहुत दौड़ धूप के दिन थे। बागलान की ओर मराठा मुगल युद्ध आरम्भ था। साल्हेर के किले को मुगल सेना ने चारों ओर से घेर लिया था। रामशेज विजित नहीं हो रहा था। बलशाली मुगल सेना को चिढ़ाते हुए सीधी गर्दन किये खड़ा था। वीर हंबीरराव अपनी सेना लेकर भीमा के प्रवाह की ओर प्रवेश कर गये थे। वे अपने अचानक आक्रमण से मुगलों को पीड़ित कर रहे थे। येसूबाई फिर से दरबार में आकर कार्य- भार सँभालने लगीं। उनके पुत्र शाहू राजा वहीं बड़े हो रहे थे। दरबार के कामों, कागजात और हिसाब किताब में खोई येसूबाई महारानी को बीच-बीच में अपने राजकुमार का स्मरण हो आता था। वे उन्हें उठाकर सीने से लगा लेती थीं। आसपास चार-पाँच किलों की देखभाल करके शम्भूराजा शाम को ही महल में आ गये थे। किस किले पर किस चीज की कमी है क्या अधिक है आदि बातों की चर्चा हुई। भोजन के समय भी राजा उदास थे। रात को राजा अपने महल में चौक के झूले पर बहुत देर तक बैठे रहे। पिछले महीने फल्टन के बजाजी निंबालकर का निधन हो गया था। अपने मामा के दुखद निधन की छाया तो उन पर थी ही, किन्तु आज वे बहुत उदास दिख रहे थे। “महाराज, तबियत ठीक नहीं है क्या?” येसूबाई ने धीमे स्वर में पूछा। “हमारे बजाजी मामा बहादुर और साहसी मराठा थे, किन्तु उनका सारा जीवन मुगलों की चाकरी में चला गया।” “जाने दीजिए। अब उन पुरानी बातों को याद करने से क्या फायदा? उनके सम्भाजी :: 419