भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 422, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 422

पुत्र महादजी बाबा आपकी सगी बहन सखुबाई के पति हैं। भविष्य में आप पर यदि कोई विपत्ति आयी तो वे शेर की तरह आपके पीछे खड़े रहेंगे।" अब शम्भुराजा के लिए चुप बैठना असम्भव हो गया। वे दाँत पीसते हुए बोले, "शेर की खाल पहनने वाली लोमड़ी जब सामने आती है तो बड़ी बदसूरत लगती है, येसू।" "मतलब?" "खबर बुरी है पर दुर्भाग्य से सही है—हमारे सगे बहनोई साहब महादजी बाबा मुगलों से मिले हुए हैं ऽऽ।" येसूबाई झट से नीचे झूले पर बैठ गयीं। उनके पेट में गोला उठ गया था। शम्भुराजा ने कहा, "पिता के स्थान पर मुगलों ने महादजी को मनसबदार बनाया है। चार हजार जाति और तीन हजार सवारों की अच्छी मनसब दी है। इसके अतिरिक्त उनके चचेरे भाई को खानजहान की सेना में समाविष्ट कर लिया गया है।" "पर ये लोग इतने बेशर्म कैसे हो गये?" "उस महादजी पर उनके अन्य सम्बन्धियों ने दबाव डाला होगा। उन्होंने कहा होगा कि बादशाह की कृपा को अपनी झोली में डाल लो। यह शिवाजी और सम्भाजी का कल का स्वराज्य कितने दिन सुरक्षित रहेगा?" चार-आठ दिन बीते नहीं कि एक दूसरी बुरी खबर राजधानी में पहुँची। महारानी येसूबाई के चचेरे भाई कान्होजी शिर्के जाकर औरंगजेब से मिल गये। यह खबर सुनकर शम्भुराजा को धक्का लगा। उन्होंने पूछा— "येसू, अब आपके सगे भाई गणोजी राव का क्या है?" येसूबाई ने गर्दन नीचे झुका ली। उन्हें भी इस विषैली हवा पर भरोसा नहीं था। तब शम्भुराजा ने पीड़ा भरे स्वर में कहा— "गणोजी राव तो केवल शरीर से स्वराज्य में घूमते हैं, मन से तो वे कब के मुगलों के राज्य में जा पहुँचे हैं।" रात में शम्भुराजा को नींद नहीं आ रही थी। वे बहुत बेचैन थे। छत में लगी झूमर की ओर देखते हुए शम्भुराजा ने कहा— "येसू मुझे कभी-कभी लगता है कि यह भूमि केवल ज्ञानियों, सन्तों और महन्तों की ही नहीं कृतघ्नों, मक्कारों और दलबदलू लोगों की भी हैं यह केवल राज्य की सेवा के लिए अपना सिर कमल चढ़ा देने वालों की ही नहीं, जमीन के छोटे टुकड़े के लिए, अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए अपने ईमान और स्वराज्य में बेच देने वाले पाजियों की भी है।" येसूबाई बहुत दुखी हुईं। राजा ने दर्द भरे स्वर में पूछा— "एक ही समय में हम क्या-क्या करें? मुगलों की पाँच लाख की सेना की 420 : सम्भाजी