छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 425, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ें‘‘दो महीने पहले उन्होंने खत में लिखा है—‘हम स्वयं सम्भाजी को पत्र ‘ लिखकर पीछे रहने के लिए कहेंगे। उनसे कहेंगे कि कम से कम अकबर को तो पकड़कर हमारे हवाले करें।‘’ उसी दोपहर में बादशाह के बड़े शहजादे मुअज्जम और असदखान के बीच विचार-विमर्श हुआ। मुअज्जम ने चिढ़कर असदखान से कहा-‘‘वजीर साहब, हमारे अब्बाजान का संशयी स्वभाव और अविश्वास उनकी परेशानी और हमारी बर्बादी का मुख्य कारण है।’’ ‘‘मतलब?’’ ‘‘मैं और आजम दोनों पैंतालीस वर्ष के हो गये हैं पर अब्बाजान को लगता है कि हम अभी अबोध और अनजान बच्चे हैं। उन्हें किसी पर रंचमात्र का भरोसा नहीं है।’’ ‘‘हमारे आजम को उन्होंने रायगढ़ न भेजकर बीजापुर-कोल्हापुर की ओर क्यों भेजा है? पता है?’’ ‘‘क्यों?’’ ‘‘चौदह साल पहले शिवाजी ने सम्भा को हमारे यहाँ मनसबदार के पद पर रखा था। तब आजम और सम्भा की थोड़ी जान-पहचान हुई थी। रायगढ़ जाने से उस दोस्ती को नयी शुरुआत मिलेगी और दोनों मिलकर बादशाह के विरुद्ध बगावत करेंगे। ऐसा उन्हें शक था।’’ कुछ दिन ऐसे ही बीते। एक दिन पन्हाला से आजम का एक हरकारा आया। बादशाह के दरबार में वह समाचार बताने लगा—‘‘खुशखबरी है हजरत! आजम साहब ने बहुत बहादुरी की है उस हंबीर मरगट्ठे को पूरी तरह कुचल डाला। उनके अनेक सैनिकों को मारकर घायल कर दिया। बहुत बहादुरी दिखाई।’’ हरकारा समझता था कि इस खुशखबरी को सुनकर बादशाह अपनी रत्नों की माला उसे पुरस्कार में दे देगा परन्तु बादशाह ने उसकी बातों पर विशेष ध्यान नहीं दिया। फिर दस दिनों के बाद आजम का एक खास दूत पत्र लेकर दरबार में विजयी मुद्रा में उपस्थित हुआ। वजीर ने उस पत्र को स्वयं पढ़कर बादशाह को सुनाया। उसमें लिखा था—‘अब्बाजान दुश्मन के साथ ढाल तलवार से जोरदार मुकाबला किया। हजरत साहब की खुश किस्मती से दुश्मन के आठ सौ सैनिकों को कत्ल किया। सात सौ को जिन्दा पकड़ा है। प्रमुख स्थानों और छतरियों पर क़ब्ज़ा किया। बहुत बड़ी विजय हासिल की।’ बादशाह ने इस ताजी खबर को सुनते हुए एक बीमार पंछी की तरह आधी आँख खोली। फिर से वह कौड़ियों की माला आँखों से लगाकर अल्लाह के चिन्तन में डूब गया। जब नहीं रहा गया तो वजीर ने बादशाह के कान में कहा, ‘‘बादशाह सम्भाजी :: 423