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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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मिलना मुश्किल है। " उस रात बादशाह को थोड़ा-सा बुखार आ गया था। उदयपुरी बेगम रातभर बादशाह के पास बैठी रहीं। उन्होंने मुअज्जम को भी वहीं रोक रखा था। बादशाह को गहरी नींद आयी।, सवेरे उनका चेहरा प्रसन्न दिख रहा था। अवसर पाकर मुअज्जम ने धीरे से पूछा—"अब्बाजान, आदमी को अपनी औलाद पर तो भरोसा रखना चाहिए। कम-से-कम हर बात को अविश्वास से तो न देखें?" औरंगजेब मुस्कराया। अपनी सफेद दाढ़ी पर हल्के से हाथ फेरकर बोला, "बेटे मुअज्जम जिसे हुकूमत का घोड़ा दौड़ाना है उसे अपनी परछाईं की ओर भी संशय से देखना चाहिए।" दो मुंब्रादेवी का दर्शन करके शम्भुराजा बगल की पहाड़ी की चोटी पर चढ़े। उनके साथ कवि कलश, रूपाजी भोसले एवं अन्य सहयोगी थे। उस पहाड़ी की चोटी से राजा ने बाई ओर देखा। दूर घोड़बन्दर किले की दिशा में थाना गाँव के पास सामने की पहाड़ी से लगी विशाल खाड़ी दिखाई पड़ी। वहीं खाड़ी आगे कल्याण बन्दरगाह तक पहुँच रही थी। दाहिनी ओर नारियल के घने जंगलों में थाना और उसके आसपास के गाँव छुपे थे। वहाँ मछुआरों की बस्ती के आसपास सफेद बालू की चमचमाती पर्त दिखाई पड़ रही थी। वहीं पर अपनी तटबन्दी को पानी में डुबोये थाना का किला एक सुस्त राक्षस की तरह खड़ा था। किले की तटबन्दी पर लम्बी टोपी वाले सैनिकों का पहरा था। शम्भुराजा बीच बीच में कल्याण बन्दर की ओर चिन्तित दृष्टि से देख रहे थे। पिछले साल इसी जंगल से मराठों ने रूहूल्लाखान को भगाया था। दो-तीन महीने बाद औरंगजेब का सेनापति रणमस्तखान कल्याण पर आक्रमण करने आया था। चोले, डोंबिवली अंबरनाथ से दूसरी ओर मुरखाड तक का क्षेत्र उसने जलाकर राख कर दिया था। मराठी क्षेत्र पर दहशत पैदा करके कल्याण के बन्दरगाह पर क़ब्ज़ा कर लिया था। "कविराज कल्याण का बन्दरगाह वैश्विक आयात-निर्यात का केन्द्र है। यहीं सम्भाजी :: 425