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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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आक्रमण का उत्तर मराठे बाहर से दे रहे थे। मराठों ने रणमस्तखान की मस्ती उतारने की शुरुआत की। कल्याण और डोंबिवली परिसर से उठने वाला धुआँ और आग की लपटें पुर्तगाली थाने किले बुर्ज से देखते रह गये। मराठों के आक्रमण से रणमस्तखान कठिनाई में आ गया। कभी मुरबाड़ के जंगल से 'हर हर महादेव' का उद्घोष करते हुए मराठे कल्याण बन्दगाह पर आक्रमण करते थे तो कभी दूर मलंगगढ़ की तलहटी से धुआँ उठने लगता था। कल्याण की खाड़ी में दौड़ते हुए घुड़सवारों की परछाइयाँ पड़ रही थीं। कल्याण की तटबन्दी गिर गयी। दुर्गाड़ी किला सूना सूना दिखने लगा। रणमस्तखान पीछे हटकर टिटवाला की ओर चला गया। टिटवाला के घाटी में गजानन की साक्षी में युद्ध आरम्भ हुआ। उसी समय डोंबिवली के शम्भुराजा के आने का समाचार हंबीरराव तक पहुँचा। यह समाचार सुनकर मराठों के शरीर का खून उबलने लगा। कल्याण बन्दरगाह परिसर के पीछे उठता हुआ धुआँ देखकर शम्भुराजा में उत्तेजना आ गयी। उन्हें खाने-पीने की भी सुध न रही। सारा दिन निलोपन्त पेशवा, कवि कलश और मानाजी मोरे की तैयारी चलती रही। शाम को ही आसपास के मछुआरों की बस्ती में खबर भेजी गयी। जंगल के निवासी और डोंबिवली के लोग तमतमा कर खड़े हो गये। सुबह होने के पहले ही मुगल और पुर्तगाली खाड़ी में कूद पड़े। अनेक लोग डूबकर मर गये। रातभर चलने वाली मराठों की भुतही लीला टिटवाला के पहाड़ से साफ-साफ दिख रही थी। रात की यह दहशत मुगलों के भीतर बैठ गयी थी। उस दिन दोपहर को भयंकर युद्ध हुआ। अट्ठावन वर्ष के हंबीरराव के शरीर में हाथी जितनी शक्ति आ गयी। रूहूल्लाखान पर हंबीरराव की सेना तेजी से टूट पड़ी। अकरमखान, इब्राहिम बेग, राजा दुर्गा सिंह, माधोराम जैसे अनेक मुसलमान और राजपूत सरदार लड़ाई मे मारे गये। डरा हुआ रूहूल्लाखान टिटवाला के रास्ते से भागने लगा। किन्तु उसे इस बात का पता न था कि बीस हजार की सेना लेकर स्वयं शम्भुराजा स्वागत के लिए खड़े हैं। भागती हुई रुहुल्ला की सेना के दिखाई पड़ते ही शम्भुराजा ने उन पर आक्रमण किया। संयोग से रणमस्तखान और रुहुल्लाखान दोनों ही घाटी में अटक गये। रात में निश्चित की गयी योजना के अनुसार एक ओर से हंबीरराव और दूसरी ओर से शम्भुराजा ने जोरदार आक्रमण किया। इसमें खान की स्थिति कुचली हुई सुपारी जैसी हो गयी। दोपहर तक खान की सारी सेना नष्ट हो गयी। जिधर भी रास्ता मिला उसी ओर लोग भागने लगे। 'हर हर महादेव ऽ ऽ', 'जय शिवा जी', 'जय सम्भाजी' ऐसा जयघोष करते हुए विजयी सेना डोंबीवेली के अपने शिविर में पहुँची। रास्ते में 430 :. सम्भाजी