छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशाहू अब एक वर्ष का हो गया था। हाथ-पैर झाड़कर आगे निकल रहे थे। शीघ्र ही चलने की सम्भावना दिख रही थी। अभी चार ही दिन हुए थे कि सेनापति हंबीरराव राजा से भेंट करने के लिए किले पर पधारे। महाराज उन्हें एकटक देख रहे थे। औरंगजेब भी हंबीरराव को 'आसमान में चलने वाला बिजली का गोला' कहकर उनकी तारीफ करता था। बुरहानपुर जैसे समृद्ध नगर में तीन दिन तक चलने वाली लूट हो या खानदेश में की गयी घुड़दौड़ हो, विदर्भ में अकोला और मुतिजापुर तक मुगलों का पीछा करना हो, जुन्नर और अहमदनगर का दौरा ही या अभी-अभी पन्हाला में शहजादा आजम की हार हो, 'हंबीर आयाऽऽ, हंबीर आयाऽ' ऐसा चिल्लाते हुए मुगल सैनिक इधर- उधर भाग जाते थे। थोड़े ही दिनों में कल्याण की ओर से बुरी खबरें आने लगीं पारसिक किले से होने वाली गोलाबारी को पुर्तगालियों ने कोई महत्त्व नहीं दिया। वे अपने संरक्षण में रसद और गोला-बारूद कल्याण की ओर ले जा रहे थे। इतना ही नहीं एक रात को पुर्तगालियों की गोला बारूद मे भरी पाँच जहाजें पारसिक किले पर आक्रमण करने आ गयीं। रातभर पानी के तट पर आग नाचती रही। सुबह होने से पहले ही पुर्तगालियों ने आधे से अधिक किला जलाकर खाक कर दिया था। पुर्तगालियों का यह समाचार सुनकर शम्भुराजा बेचैन हो गये। उन्होंने सेनापति से पूछा-"हंबीरराव, यह फिरंगी मुगलों की थूक चाटने के लिए इतना क्यों नाच रहा है?" "महाराज, आपने भी सुना होगा कि उन दोनों के बीच एक समझौता हुआ है। कोंकण का जितना क्षेत्र मुगल जीतेंगे उसे पुर्तगालियों को देकर, उपकार का बदला चुकाएँगे।" "हंबीरराव पुर्तगालियों और मुगलों को मिलने से पहले उन्हें तोड़ना आवश्यक है। तो तत्काल निकलिए और उन टोपीधारियों को जलाकर राख कर दीजिए।" "जैसी आपकी आज्ञा, महाराज।" हंबीरराव ने अपने पूर्व निश्चित स्थान की ओर न जाकर कल्याण की ओर दौड़ लगाई। हंबीरराव के पहुँचने से पहले रणमस्तखान ने बिठोजी माने नामक मगठा सरदार को बहुत पीड़ित किया था। हंबीरराव के नेतृत्व में बीस हजार सवार और दस हजार की पैदल सेना कल्याण पहुँची। औरंगजेब को पता था कि अकेले रणमस्तखान को मराठे संकट में डाल देंगे इसलिए उसने अपने मौसरे भाई रूहूल्लाखान को रणमस्तखान की सहायता के लिए भेजा। कल्याण की खाड़ी पर युद्ध शुरू हुआ। पानी के किनारे से होने वाले सम्भाजी 429