छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 430, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकविकल्श ने राजा की ओर देखा तब राजा स्वयं बताने लगे—"यह रणमस्तखान फन्नी पहले आदिलशाह का सरदार था। पर बाद में मुगलों से मिल गया। कविराज, हमारे पिताजी जालना से पन्हाला जाने के लिए निकले थे। तब इसी ने उनको संगमनेर के जंगल में तीन दिन तक बन्दी बना रखा था।" एक ठंडी साँस लेकर शम्भूराजा ने कहा, "कविराज, एक बात का स्मरण रखिये। उत्तर से मुगल सेना के साथ आये सरदारों की हमें कोई चिन्ता नहीं होती किन्तु, दक्षिण के लोग अधिक खतरनाक हैं।" शम्भूराजा पारसिक किला बनवाने में व्यस्त थे। फिर अनेक मराठा दल सोलापुर क्षेत्र में धावा करते हुए दहशत फैला रहे थे। शहाबुद्दीन खान की सेना के साथ पुरन्दर, शिवापुर और राजगढ़ में निरंतर झड़प हो रही थी। राजा ने केशव त्रिमल, निलो मोरेश्वर पेशवा और रूपाजी भोसले जैसे सरदारों को पुनः कल्याण पर आक्रमण करने के लिए भेजा था। एक समय में बादशाह के साथ राज्य में अनेक स्थानों पर आग का खेल चालू था। इसलिए कुछ प्रशासकीय कार्य भी रुके हुए थे। उन्हें निपटाने के लिए राजा रायगढ़ के लिए निकले। शम्भूराजा ने मुंब्रा के अपने स्थान पर सन्देशा भेजा—"कविराज, पन्हाला में हंबीरराव को तत्काल सन्देश भेजिये और कहिये कि वहाँ का आक्रमण शान्त हो गया हो तो अपने घोड़े तुरन्त कल्याण की ओर ले आइए। बरसात शुरू होने से पहले रणमस्तखान की गर्दन तोड़नी चाहिए।" "और महाराज तब तक हमारे लिए क्या आज्ञा है?" तुकोजी शिंदे ने पूछा। "कल्याण का किला फिर से अपने क़ब्ज़े में लेकर राजा पर उपकार कीजिए। दूसरा क्या है?" राजा ने कहा। पारसिक का किला और खाड़ी की व्यवस्था अपने सहयोगियों को सौंपकर राजा रायगढ़ चले गये। राजा रायगढ़ जा रहे तभी गुप्तचरों ने सूचना दी— "महाराज, वह फिरंगी पलट गया है। थाने की खाड़ी से पुर्तगालियों के जहाज कल्याण की ओर जाने लगे हैं?" "अच्छा तो अपना पारसिक का किलेदार क्या कर रहा है?" राजा ने उसी जगह लगाम खींचकर घोड़ा खड़ा कर दिया। "अपने पारसिक किले की सेना रात-दिन गोले फेंक रही है। उनकी छोटी- मोटी जहाजें और नावें जलाकर खाक कर दी गयीं। पर खाड़ी बहुत बड़ी है। उसकी चौड़ाई भी बहुत है, महाराज।" राजा ने सुझाव दिया—"फिर आप लोग निराश न होना। जितना सम्भव हो फिरंगी को उतना नष्ट कीजिए।" महाराज रायगढ़ पर आए। बहुत दिनों के बाद येसूबाई से भेंट हुई थी। बेटा 428 :: सम्भाजी