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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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तीन "दिल्ली के बादशाह की शक्ति गैंडे की थी। उसके सामने मराठों का यह उत्साही राजा बकरी का बच्चा था। एक बार यह गैंडा सम्भाजी और उसके महाराष्ट्र को कुचल दिया तो फिर अपना फायदा-ही-फायदा है।" गोवा के पुर्तगाली वाइसराय कांट द आल्होर ने चिढ़कर कहा। "वह कैसे?" उनके सचिव गोंसाल्विस ने पूछा। "औरंगजेब जिस उत्साह से आएगा उसी उत्साह से पीछे लौट भी जाएगा फिर हम धीरे से मालवण से थाना तक का क्षेत्र अपने राज्य में मिला लेंगे। गोवा का महाराष्ट्र बनाएँगे।" कांट साहब अपने ऊँचे राजमहल के भव्य मयखाने में मदिरा का घूँट लेते हुए बोल रहे थे। बढ़-चढ़कर बोलने वाला वाइसराय शम्भूराजा के उस पत्र की ओर बार बार वितिष्णा के साथ देख रहा था। वह जितना विलासी था, उतना ही खुशदिल हद दर्जे का स्वार्थी और धूर्त भी था। पुर्तगालियों की राजसेवा के सारे अधिकारी और कर्मचारी सरकारी सेवा के साथ-साथ अपना स्वतन्त्र व्यापार भी करते थे। पूर्वी गोलार्ध में कुस्तुनतुनियाँ और दुला के बाद पणजी व्यापार की दृष्टि मे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बन्दरगाह था। गोवा का वाइसराय अपनी तुलना पुर्तगाल के राजा से करता था। उसकी अपनी स्वतन्त्र सेना तो थी ही। उसमें उमने अनेक काले अफ्रीकी हबशी भी भर्ती किये थे। पणजी शहर के चारों ओर डेढ़ पोरसा ऊँची भव्य पाषाणी प्राचीर बनाकर वह प्रसन्नता से रह रहा था। दोनों ओर पंख फैलाकर बैठे हुए मशक्त पंछी की तरह दिखाई देने वाला उसका राजमहल, चाँदनी को तरह चमचमाती रेत पर खड़ा था। उसका पिछला हिस्सा समुद्र की ओर झुका हुआ था। चारों ओर हवा के साथ झूमने वाले ऊँचे नारियल के पेड़ थे। बीच में वाइसराय के पारिवारिक जनों के तैरने के लिए नीले पानी से भरा तालाब था। इस परिसर में विशेष मेहमानों के लिए अनेक महल थे। ऐसा लगता था। मानो इस राजप्रासाद के सामने स्वर्ग ही उतर आया है। कांट साहब का व्यक्तित्व भी बहुत आकर्षक था। मध्यम ऊँचाई, थोड़े मोटे, लम्बी बाँहों वाला फूला हुआ कोट और ढीला पैंट, गालों तक कटी हुई मूँछें, भूरी दाढ़ी और भूरी भूरी आँखें उन आँखों में समीप से झाँकने पर भी यह पता लगाना कठिन था कि कांट साहब के मन में क्या चल रहा है? उनकी टाई हमेशा अच्छी 432 :: सम्भाजी