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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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तरह बँधी रहती थी। एक-दो दिनों में ही वाइसराय को कुछ दुर्लभ उपलब्धि करनी थी। बीच में ही उसे स्मरण हुआ तो उनके चेहरे पर प्रसन्नता की लहर फैल गयी। उसी धुन में उसने सचिव से सम्भाजी का पत्र पढ़ने के लिए कहा। सचिव पढ़ने लगा- "मराठी राज्य का कार्यभार सँभालते मुझे लगभग ढाई वर्ष हो चुके हैं। इसके पहले हमारे दूत रामजी ठाकुर के माध्यम से आपसे पत्र व्यवहार हुआ था। मित्रता की शर्तों और समझौतों के सम्बन्ध में भी बहुत पत्राचार हो चुका है। आपने ही अनेक बार स्मरण दिलाया है कि आप हमारे शीव के पड़ोसी हैं। किन्तु आप कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। आपने वादा किया था कि आप दिल्ली के बादशाह की कोई सहायता नहीं करेंगे। हमारी लड़ाई के समय आप मुगलों-दोनों से तटस्थ रहेंगे। किन्तु दुर्भाग्य से आपने मैत्री समझौते की शर्त और शर्म दोनों किनारे कर दिया। सूरत की ओर से समुद्री रास्ते से आने वाले गोले बारूद और रसद को अपनी सीमा से ले आने की आपने मुगलों को इजाजत दे दी। ऐसी ही गद्दारी आपने थाना क्षेत्र में भी की थी। ध्यान में रखिए कि इस तरह के धोखे वाली चाल का परिणाम आपको एक न एक दिन अवश्य भोगना पड़ेगा।" वाइसराय अचानक गम्भीर हो गया। एक ओर सम्भाजी की धमकी और दूसरी ओर औरंगजेब का तकाजा। दोनों ही बातें महँगी पड़ने वाली थीं। उसने परेशान होकर कहा, "इन दोनों शक्तियों के सामने जाना किसी मदारी के शरीर पर विषैले साँप के खेल जैसा है।" "लेकिन सर बादशाह ने आग्रह किया है कि आप सम्भाजी के साथ खुली लड़ाई का एलान करें।" सचिव ने स्मरण दिलाया। "ऐसा करना हमारे लिए महँगा पड़ेगा। यह सम्भा बहुत क्रोधी है, एक दम गर्म दिमाग का। हमारे कुलाबा और थाना के अनेक बन्दरगाहों पर उसने एक साथ आक्रमण किया है। बार बार का अग्निकांड तो चल ही रहा है। बसई की तरफ के दो धर्मगुरुओं को वहाँ के सूबेदार ने बन्दी बना लिया है।" "लेकिन सर आपने भी तो उसका बदला ले लिया है। मराठों का वकील येसाजी गम्भीरराव पिछले तीन महीनों से हमारी कैद में है।" आधी रात को येसाजी गम्भीरराव को राजभवन में बुलाया गया। उनकी ओर देखकर वाइसराय गुर्राया—"येसाजी हम दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाते हैं तो आपका मालिक दुश्मनी पर उतर रहा है। यह ठीक नहीं है।" सरकार ताली कभी एक हाथ से बजती है क्या? औरंगजेब का गोला बारूद से भरा हुआ भंडार मुगलों के प्रदेश से हमारे राज्य में आप कैसे घुसने देते हैं? यह बात आपकी मित्रता की नीति के अनुकूल है क्या?" सम्भाजी . 433