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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"येसाजी आपका राजा मतवाला है।" वाइसराय ऊँची आवाज मे पूछने लगे- "आपका राजा अरबों से दोस्ती कैसे रखता है?" "जिस तरह आप मुगलों से छुपकर दोस्ती रखते हैं। ठीक उसी तरह।" वाइसराय और उनके सचिव येसाजी के निर्भीक उत्तर सुनकर कुछ देर तक चुपचाप बैठे रहे। किन्तु येसाजी से रहा नहीं गया। अपने मन की व्यथा को प्रकट करते हुए बोले, "विजरई सरकार, सम्भाजी से मित्रता रखने की बात आपके मन में कभी थी ही नहीं। आप सिर्फ एक मौके की प्रतीक्षा कर रहे हैं।" "कौन से?" "औरंगजेब की सेना से मराठों का विनाश होने वाले मौके की।" "नहीं नहीं येसाजी ये आप क्या कर रहे हैं? भला इसमें हम पुर्तगालियों का क्या फायदा?" वाइसराय ने हँसते हुए पूछा। "बहुत बड़ा फायदा, बेगुर्ला से चौल-पनवेल तक का समुद्री तट, वहाँ का व्यापार, धन दौलत, अनाज लूटने के लिए आप पुर्तगाली जाने कब से बेचैन हैं।" येसाजी ने थोड़े से शब्दों में पुर्तगालियों का उद्देश्य स्पष्ट कर दिया था। किन्तु उसकी ओर ध्यान न देते हुए वाइसराय ने कहा, "आपको पात है येसाजी, अभी पिछले महीने ही आपके सम्भाजी राजा ने हमारे रेवदांडा के किले पर आक्रमण किया था। तारापुर, दहाणू, थाना के हमारे समुद्री तट पर जहाँ सम्भव हुआ अपना घोड़ा दौड़ाया। हमारा प्रदेश जल रहा है। आपके सम्भाजी ने चौल की सीमा पर छः हजार सिपाही और दो हजार घुड़सवार घुसा दिये हैं। उन्होंने वहाँ पर हमारे पूरे गाँव की नाकाबन्दी कर दी है।" येमाजी के चेहरे पर प्रसन्नता छा गयी। तीन महीने की कैद में उन्हें अपने राज्य का कोई समाचार नहीं मिला था। बहुत दिनों के बाद अच्छी खबर सुनने को मिली थी। येसाजी को पुनः जेल में ले जाया गया। कांट द आल्होर कुछ देर तक वैसे ही विचार में डूबे रहे। फिर एक माहसी कल्पना उसके मन में आयी। उसने अपने सचिव से कहा, "दिल्ली के शाहंशाह ने आग्रह किया कि कुछ भी करके मराठों के साथ युद्ध की घोषणा कीजिए। किन्तु वह कठिन कार्य लगता है। जैसे किमी आदमी का हाथ पैर तोड़कर उसे विकलांग बना दिया जाय वैसी ही अवस्था सम्भाजी ने जंजीरे के सिद्दी की बना दी है। इसलिए उससे खुला बैर रखना साहस का कार्य लगता है।" सचिव दुविधा में पड़ गया कि कहे या न कहे। फिर भी साहस बटोरकर उसने कहा, "सर सम्भाजी का प्रदेश अपनी सीमा से लगा हुआ है। डिचोली और कुडाल के बारूदखाने में सम्भाजी अनेक बार आते हैं। "मुझे मालूम है।" 434 .: सम्भाजी