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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"बहुत बार वे शिकार के लिए निडर होकर इधर-उधर घूमते हैं। हिन्दुओं के देवस्थानों का दर्शन करते हैं। तब उसके साथ थोड़े ही सिपाही होते हैं।" "हूँऽऽ.." कुछ सोचकर वाइसराय का चेहरा खिल उठा। उसने अपने सचिव को आदेश दिया—"अपनी सेना को सावधान रहने के लिए कहो। वह सम्भा इधर कब आता है ? कब जाता है ? कहाँ घूमता है ? उसकी हर एक गतिविधि पर नजर रखो।" दिनाँक 12 अगस्त. 1683 का वह दिन। सुबह होते ही वाइसराय कांट द आल्होर की शाही नाव दीवाड़ी बन्दरगाह तक आ गयी थी। सामने गोवा की पंचगंगा नदी बह रही थी। आज गोकुल अष्टमी का दिन था। दीवाड़ी-बन्दरगाह पार करने के बाद सामने भतगाँव का नाखे गाँव था। नाखे गाँव के लिए गोकुल अष्टमी का दिन आनन्द का दिन होता था। ऐसा सभी का विश्वास था कि गोकुल अष्टमी के दिन नाखे के घाट पर स्नान किया तो बहुत पुण्य लाभ होता है। इसलिए गोवा बारदेश से बेगुर्ला तक के अनके हिन्दू इस पर्व का पुण्य लूटने दौड़े आते थे। अभी तक सूर्य ठीक से ऊपर नहीं आये थे। अभी भी जल का प्रवाह काला दिखाई पड़ रहा था। दीवाड़ी के तट के ऊपर से वाइसराय अपनी भरी आँखों से नदी के पार देख रहा था। उसकी दाहिनी ओर दीवाड़ी के थानेदार और फौजदार खड़े थे। दिन निकलने के बाद कांट साहब ने फौजदार के हाथ से पीतल की दूरबीन अपने हाथ में ली। उमसे नदी के पार देखा। अब दूसरी ओर का सम्भाजी के अधिकार वाला हरा भरा क्षेत्र स्पष्ट दिखाई देने लगा। कांट साहब के मन में गुदगुदी होने लगी। औरंगजेब ने वाइसराय को अनेक पत्र भेजे थे। सभी में उसने वही बात दोहराई थी। "सम्भाजी के जितने क्षेत्र पर आप क़ब्ज़ा करेंगे वह सारा क्षेत्र हम पुर्तगालियों को दे देंगे। किन्तु आप इस काफिर के बच्चे को किसी तरह जिन्दा या मुर्दा पकड़ लिया तो गोवा के साथ कोंकण का पूरा क्षेत्र हम आपकी दे देंगे।" किसे मालूम किन्तु वाइसराय को औरंगजेब पर बहुत भरोसा लग रहा था। किसी भी प्रकार से पुर्तगालियों को बेगुर्ला से पनवेल तक के सम्पन्न इलाके पर क़ब्ज़ा करना था। उसके लिए वे पिछले अनेक वर्षों से प्रयत्नशील थे। दो दिन पहले गुप्तचरों ने गोवा के राजभवन में जब यह खुशखबरी दी तब पचास वर्ष का अनुभवी, अनेक देशों में घूमा हुआ वाइसराय भी खुशी से पागल हो . गया। उसे कल्पना नहीं थी कि उसका भाग्य इतना अच्छा होगा? गोकुल अष्टमी के शुभ मुहूर्त में नाखे घाट पर शम्भुराजा आने वाले थे। उन्हें पवित्र स्नान करना था। यह पक्की खबर थी। सम्भाजी :: 435