छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔरंगाबाद का महल बादशाह को कैदखाने से भी बदतर लग रहा था। अँधेरी रात में नगर द्वार पर आपातकाल की घोषणा करने वाले नगाड़े के बजने से जिस तरह कँपकँपी छूटती है, वैसी ही दशा बादशाह को डेढ़ वर्ष बीत चुका था फिर भी उसके हाथ क्या लगा? दो-तीन अच्छे सरदारों को बदलने पर भी रामशेज जैसा छोटा किला मुगलों के हाथ नहीं आया। चालीस-पचास हजार की सेना लेकर दो बड़े सरदार दो-दो बार कोंकण में भेजने के बावजूद सफलता नहीं मिली। शहजादा अकबर मिला नहीं और वह जहन्नुमी काफिर का बच्चा सम्भा पकड़ में नहीं आया। जंजीरे के कासिम और खैरियत खान के तकदीर किला तो बचा लिया किन्तु वे भी सम्भाजी से अत्यन्त भयभीत थे। बादशाह ने उन्हें बारूद और रसद से भरी जहाजें सूरत के रास्ते से भेजी थीं लेकिन बादशाह के हजार कहने पर भी सिद्दी बन्धु मराठा प्रदेश पर आक्रमण करने के लिए तैयार न थे। बादशाह के अनेक बार उकसाने पर भी गोवा का पुर्तगाली वाइसराय अपनी ओर सम्भाजी पर हथियार उठाने का साहस नहीं कर रहा था। सम्भाजी के डर से अँग्रेज अपनी कोठियों के बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं थे। स्वयं सम्भाजी त्रिचनापल्ली में अड्डा जमाकर बैठे थे। तब मैसूर के चिक्कदेवराय ने सहायता के लिए बुलाया था। लेकिन अब यह भी अपने स्वार्थ के लिए चुप बैठ गया था। हाल ही में बादशाह का छोटा शहजादा पराजित होकर वापस आया था। हंबीरराव ने उसे नीरा नदी के पार खदेड़ दिया था। इन घटनाओं ने बादशाह को विचलित कर दिया था। वह चाँदनी रात उसे काटने दौड़ रही थी। उसने असद खान से बड़े पीड़ा भरे स्वर में पूछा- "वजीरे आजम, पचीस-छब्बीस वर्ष का एक लड़का हमें हैरान करके रख दे रहा है। इसका मतलब क्या है? कौन-सी चीज नहीं है हमारे पास? खजाना?'' "वह तो बहुत है।'' "जंगी फौज? जंग बहादुर सिपाही?'' "जरूरत से कुछ ज्यादा हजरत, अपनी फौज का विशाल सागर किसी ने दूर से भी देखा तो उसे कँपकँपी छूट जाती है।'' "असल बात कुछ और है वजीरे आजम।'' बादशाह ने बड़े दुख से कहा। "यहाँ के पहाड़ों में जाने की कल्पना और सम्भाजी के नाम से अपने फौजी डरते हैं।'' बादशाह अपनी मसनद से झटके से उठा और फिर बड़ी बेचैनी से बैठ गया। बेचैनी से बड़बड़ाया-"हमारी उम्र पैंसठ साल की और वह काफिर का बच्चा पचीस-छब्बीस का होगा। एक ओर हिन्दुस्तान का शाहंशाह और दूसरी ओर गाँव के जमींदार का लौंडा। वह हमारा कुछ कर ही नहीं सकता। लेकिन हम उसे रोक 446 :: सम्भाजी