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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"महँगा इलाज होगा, हुजूर।" "खर्चे की फिक्र न कर बोल।" उसी दिन साईस एक मान्त्रिक को खान के सामने लेकर आया। मान्त्रिक ने आत्मविश्वास से कहा, "खान साहब मात्र सौ तोले सोने का एक साँप मुझे बनवाने दीजिए और फिर मेरे पीछे-पीछे किले के दरवाजे तक आइए। देखिये कि दरवाजा किस तरह अपने आप खुल जाता है?" नासिक के एक सोनार को यह काम सौंपा गया। स्वर्ण सर्प तैयार होने लगा। बादशाह रोज तगादा कर रहा था। "रामशेज जीतने के लिए क्या कोशिश जारी है?" इसका समाचार बहादुरखान ने आलमगीर के पास भेज दिया था, उसमें सोने के साँप का भी जिक्र था और भी तमाम छोटी-छोटी बातें लिख दी थीं। वह मान्त्रिक उस दिन बड़े उत्साह में था। हाथ में वह सौ तोले का सर्पराज नचा रहा था। अब दरवाजा अपने आप खुल जाएगा, यह सोचकर सारे लोग मान्त्रिक और साईस के पीछे चल रहे थे। साथ में सवार राऊत, शौकीन लोग बहादुर खान भी चले। दरवाजे के समीप पहुँचते ही किले के ऊपर से पत्थर गिरने लगे। एक पत्थर साईस के सीने में लगा। वह वहीं पर चक्कर खाकर गिर गया। दूसरा पत्थर मान्त्रिक के सर में लगा। स्वर्णसर्प उसके हाथ से छूट गया। 'या अल्लाहऽऽ' करते हुए, अपना खून से सना सिर एक हाथ से पकड़े वह आते ही जा रहे थे। रामशेज की तटबन्दी ठठाकर हँसने लगी। बादशाह ने थोड़े दिनों बाद अपने भाई शाहजहान बहादुर खान को आड़े हाथों लिया—"आपकी उम्र जैसी-जैसी बढ़ रही है अक्ल छोटी होती जा रही है। याद है आपको बहादुरगढ़ की घटना? एक छोटी-सी फौज के साथ शिवाजी ने आपको चकमा दिया था और आप किले का दरवाजा खुला छोड़कर बेवकूफ की तरह अपनी फौज लेकर दौड़ पड़े थे। करोड़ों का खजाना लूटकर शिवाजी ने आपको मूर्ख बनाया था। इस सम्भा ने तो और भी कमाल किया। अपने ही जानवरों और लोगों की लाशें लेकर उल्टी दिशा में फेंक दीं। आप लोगों को उल्टियाँ आने लगीं और इस गड़बड़ी में अपनी रसद और बारूद किले पर पहुँचा दिया। खैर, शिवाजी का यह बच्चा भी अपने बाप की तरह हमारा बाप निकला। यह कैसी है हमारी तकदीर?" छह सम्भाजी :: 445