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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"जहाँपनाह इतनी जल्दी?" "वजीरे-आजम दोस्त हो या दुश्मन, एक बात तो सच है कि शिवाजी के इस लड़के ने मुझे बुढ़ापे में भी जवान बना दिया है।" दो राजापुर की खाड़ी में हवा तेजी से चल रही थी। तम्बू की कनातें हिल रही थीं। न जाने क्यों शंभूराजा को नींद नहीं आ रही थी। खंडो बल्लाल तीन दिन पहले ही वहाँ आ चुके थे। राजा ने उन्हें बुलवाया। खंडोजी के तम्बू में आते ही राजा का ध्यान उनकी लम्बी नाक और तेजस्वी आँखों पर गया। कुछ क्षण के लिए उन्हें बालाजी चिटणीस के ही आ जाने का आभास हुआ। राजा ने खंडोजी को सामने बैठने का आदेश दिया। कुछ देर विचार-विमर्श करने के बाद शंभूराजा ने कहा, "खंडोबा आप हमारे राज्य के सचिव हैं। आजकल तारापुर, थाना, चोल, रेवदंडा जैसी अनेक जगहों पर समुद्रतट में युद्ध छिड़ा है। एक ही समय में कहाँ और कितनी सेना भेजनी है? इसका विचार आपको करना है। ऐसे समय में आपका रायगढ़ पर रहना अति आवश्यक है।" "परन्तु महाराज।" "अकेली महारानी के कन्धों पर कितनी जिम्मेदारी देंगे? कविराज यदि वहाँ होते तो हमें वहाँ की इतनी चिन्ता न होती। मुझे लगता है कि शीघ्रातिशीघ्र वहाँ के लिए प्रस्थान करें।" खंडो बल्लाल वैसे सिर नीचा किये बैठे रहे। उनकी निरुत्साही प्रतिक्रिया से शम्भू महाराज भी कुछ विचलित हो गये थे। यह देखकर खंडो बल्लाल ने कहा, "यहाँ मैं अपने मन से थोड़े ही आया हूँ? महारानी साहिबा ने मुझे आने के लिए विवश किया।" "क्या मतलब?" "उनके विचार से आजकल आपकी ग्रह स्थिति कुछ ठीक नहीं है। इसलिए आपके साथ पराछाईं बनकर रहने के लिए कहा गया है।" अपनी प्रिय रानी की स्मृति से शम्भूराजा का मन प्रसन्न हो गया। शंभूराजा की प्रसन्न मुद्रा देखकर खंडो बल्लाल की जान में जान आयी। उन्होंने कहा, "महाराज यहाँ रुकने में मेरा भी कुछ स्वार्थ है।" 460 :: सम्भाजी