छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचार पणजी बन्दरगाह के शराबखाने मे लोगों की भीड़ थी। किनारे पर लंगर डाले हुए अनेक जहाजों के नाविक, देश-विदेश के मुसाफिर, व्यापारी, चोर-उचक्के जैसे हर प्रकार के लोगों की भीड़ होती थी। दो-तीन दिनों से कुछ अपरिचित लोग वहाँ आते-जाते दिखाई पड़ते थे। उनकी वेशभूषा से उन्हें ठीक-ठीक पहचानना असम्भव था। यदि उन्हें नीली आँखों वाले कोंकणी लोगों के रूप में जाना जाये तो उनकी लम्बी, काली, नुकीली दाढ़ी अफगानियों की थी। गोरे रंग के कारण उन्हें फिरंगी समझा जा सकता था किन्तु उनकी रहन-सहन और दबी जबान में बातचीत विचित्र थी। मदिरा का प्याला खाली करते हुए वे एक-दूसरे से कह रहे थे-‘‘संभा ने फोंडा के किले पर चार-पाँच करोड़ का खजाना लाकर रखा है। बारूद का बड़ा भंडार भी रखा है कुछ दिनों में उसकी फौज भी वहाँ आनेवाली है। दो-तीन दिनों में ही इस गुप्तचर्चा के असंख्य पैर उग आये। फिरंगियों के गुप्तचर खबरों को एकत्र करने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर सदैव बने रहते थे। उन्होंने यह खबर तत्काल कांट-द-आल्होर तक पहुँचा दी। जिन दो गुप्तचरों ने वाइसराय तक यह खबर पहुँचाई थी उनकी सूचना कभी गलत नहीं हुई थी। वाइसराय कहने लगा-‘‘शिवाजी के इस छोकरे को पहले से ही गोवा में बड़ी रुचि है। कुछ दिन पहले वह अंजदीव टापू पर चूना-पत्थर लेकर आया था। वहाँ पर वह किला बनाना चाहता था।’’ वाइसराय ने बड़ी सावधानी से जासूसों के एक दूसरे गुट से उस खबर की निगरानी की। कांट द आल्होर ने फोंडा के किले की ओर भी कुछ गुप्तचर भेज दिये। उन्हें खबर मिली की फोंडा किले की मराठा सेना बहुत कम और कमजोर है। किन्तु यह भी पता चला कि वहाँ कुछ विशेष बात है। ऐसी खबर मिलते ही कांट अपनी विजय की कल्पना करके नाचने लगा। दो महीना पहले नारवा नदी से बच निकला था। अब देखता हूँ। वाइसराय अपने आपसे बोल रहा था। उसे यह भी खबर मिल गयी थी कि शीघ्र ही औरंगजेब की सेना इधर आ रही है। उसके आने के पहले ही किला जीतकर खजाना लूट लिया जाएगा। अपनी विजय की कल्पना करके वह थैया-थैया करके नाचने लगा। वाइसराय ने अपने सहयोगियों के साथ विचार विमर्श किया। कांट को सहायता के लिए गोवा के अनेक पादरी, कैप्टन दिओगो, आदि आ गये। अन्ततः वाइसराय ने तीन हजार थल सेना जमा की। उसमें दो हजार साष्टी महल के सम्भाजी :: 465