छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 480, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी फौज वहाँ से फोंडा की तटबन्दी के पास पहुँची शम्भूमहाराज ने सूबेदार को तटबन्दी के पुनर्निमाण का आदेश दिया। आदेश पाते ही बेलदार और कामाठियों का दल अपने काम पर जुट गया। शम्भूमहाराज का घोड़ा तट के पास से आगे बढ़ रहा था उनके पीछे-पीछे येसाजी कंक और खंडो बल्लाल के घोड़े चल रहे थे। पुर्तगालियों का वकील साराइव्ह द अल्बुकर्क सवेरे से ही महाराज की प्रतीक्षा करते बैठा था। शम्भू महाराज जानबूझकर उसकी उपेक्षा कर रहे थे। साथ-साथ चल रहे येसा से महाराज ने पूछा— "येसाजी काका, कृष्णाजी का स्वास्थ्य अब कैसा है?" "कल ही गाँव से खबर आयी थी। घाव अभी भी भरे नहीं हैं। अभी भी खतरा टला नहीं है।" "तो फिर येसाजी काका आप इतना हठ क्यों कर रहे हैं?" घोड़े का मुँह घुमाते हुए शम्भूमहाराज ने पूछा। "महाराज आपको संकट में कैसे छोड़ूँ? कभी आधा पेट खाकर उठ जाना सम्भव हो सकता है किन्तु लड़ाई को आधे में छोड़ देना बहुत खतरनाक होता है, महाराज।" येसाजी का आशय समझकर महाराज चुप हो गये। आगे बढ़ते हुए वे कार्य का निरीक्षण कर रहे थे। उसी समय किले के दूसरे छोर पर कुछ शोरगुल सुनाई पड़ा। महाराज का संकेत पाकर खंडो बल्लाल उसी ओर आगे बढ़ गये। थोड़े ही समय में लौटकर कहने लगे—'महाराज उधर चलिए। वहाँ बड़ा हंगामा हो रहा है। सैनिक और वहाँ के निवासी मेरी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।" "वहाँ ऐसा क्या हो रहा है?" "वहाँ पर ईसाइयों की माता 'लेडी वर्जिन' की मूर्ति है, उस मूर्ति को कुछ लोग तोड़ना चाहते हैं और वहाँ पर जो छोटा-सा चर्च है, उसमें आग लगाने की तैयारी कर रहे हैं।" यह समाचार सुनते ही शम्भूमहाराज चिन्तित हो गये। वे घोड़े को एड़ लगाकर जल्दी से आगे बढ़े। आगे का बुर्ज पार करके वे आगे बढ़े। लोगों की सन्तप्त भीड़ चर्च को आग लगाने की तैयारी कर रही थी। एक ओर से आग लगाई भी जा चुकी थी। उसी समय शम्भू महाराज का घोड़ा वहाँ पहुच गया। उन्होंने कड़कती आवाज में डाँटते हुए कहा, "अपने हाथों को सँभालो। पहले आग को बुझाओ, नहीं तो एक-एक के टुकड़े करके रख दूँगा।" शम्भू महाराज के सहयोगी भी वहाँ पहुँच गये। आग बुझाते समय कई सैनिकों के हाथ जल गये। गोवा के कई हिन्दू वहाँ पर दिखाई पड़ रहे थे। उन्होंने ही शम्भू महाराज के सैनिकों को 478 :: सम्भाजी