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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सात गोवा की उस लाल धरती पर जोरदार लड़ाई चल रही थी। माष्टी और बारदेश में मराठा फौज डटकर लड़ रही थी। नारियल सुपारी के वनों से धुआँ उठ रहा था। अपने बलवान और बहादुर सैनिकों को महाराज ने पणजी के चारों ओर फैला दिया था। एक महीने के बाद भी मराठा फौज डटकर लड़ रही थी उधर बेंगुर्ला मे औरंगजेब ने अपनी जहाजो का लंगर डाल दिया था। गोवा के समुद्र में रसद उतारने की अनुमति उन्हें वाइसराय कांट नहीं दे रहा था। जिन मुगलों के साथ उन्होंने समझौता किया था उनसे भी फिरंगी डरने लगे थे। मराठों का शक्तिशाली विरोध देखकर उन्होंने मुगलों की सहायता का आश्वासन दिया था। परन्तु वे यह भी सोचते थे कि परिस्थिति का लाभ उठाकर मुगलों ने ही गोवा पर कब्जा कर लिया तो क्या होगा ? शम्भूमहाराज बहुत अस्वस्थ दिख रहे थे। पाखरा घोड़े पर वे मांडवी के दोनो ओर चक्कर लगाते रहते थे। पणजी की तटबन्दी उसके बड़े बुर्ज बुर्जो पर लगी बड़ी-बड़ी तोपें, समुद्र और खाडी में निरन्तर गश्त लगाती जहाजें वे निरन्तर देखते रहते थे। पणजी पर अधिकार करने का उत्साह उनमें बार-बार आता था। साथ-साथ चलने वाले कवि कलश, दुर्गादास, शहजादा अकबर से वे कहते थे- "कुछ भी कीजिए। कोई-न-कोई योजना बनकर हमें पणजी को अपने अधिकार में लेना ही है। यदि शहर में हमारे पाँच सात सौ लोग घुसकर उपद्रव मचा सकें तो बाद में बाहर कैसे सहायता की जाये तो काम बन सकता है इसे हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं।" शहजादा अकबर का वाइसराय आल्होर के साथ पत्राचार चल रहा था। शहजादा अकबर ने पणजी के पास एक जहाज के निर्माण की अनुमति माँगी थी। फिरंगियों से अनुमति मिलते ही, इस ओर के तट पर लुहार-बढ़ई आदि की आवाजाही आरम्भ हो गयी। उनकी संख्या बढ़ती देखकर वाइसराय को आशंका हुई। उसने इस भीड़ और भीड़ के पणजी में आवास पर प्रतिबंध लगा दिया। समझौता करने के उद्देश्य से अकबर एक बार अपने छः सौ सैनिकों के साथ निकला। उस समय फिरंगियों ने उनका विरोध किया। एक ओर शम्भूमहाराज गोवा को अपने अधिकार में लेने के लिए बेचैन हो रहे थे तो दूसरी ओर वाइसराय अपने राज्य की रक्षा का जी-जान से प्रयास कर रहा था। महाराज आज कुछ तनावग्रस्त दिखाई पड़ रहे थे। दो दिन पहले ही उनकी सम्भाजी 481