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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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दो हजार की स्थल सेना और एक हजार की अश्व सेना मड़गाँव मे प्रवेश कर चुकी थी। महाराज ने गोवा के अपने सभी सेनानायकों और अधिकारियों को आदेश भेजा, "पुर्तगालियों की सम्पत्ति अवश्य लूटो किन्तु किसी भी व्यक्ति को आघात पहुँचाने का कोई उपयोग नहीं है। चर्चों के साथ सभी धर्मों के प्रार्थना स्थलों का सम्मान करो।" डिचोली के महल में शम्भूमहाराज फिरंगियों पर किये आक्रमण का समाचार ले रहे थे। उसी समय कवि कलश ने महाराज से पूछा—"पणजी पर किया गया आक्रमण अभी और कितने दिन चालू रखना है? पुर्तगालियों का वकील साराइव्ह् दे अल्बुकर्क, सुलह के लिए आपके पास बहुत चक्कर काट रहा है।" "उससे कहिये कि सूरत से औरंगजेब ने तो रसद भेजी है उसकी आधी रसद हमारे हवाले कर दो फिर समझौते की शतरंज बिछाओ।" कवि कलश दिल खोलकर हँसे। उन्होंने बड़े उत्साह से कहा, "राजन! एक दूसरी बात के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाये उतनी ही कम है।" "हुआ क्या? हमें भी तो कुछ बताइये।" "गोवा पर अपने जोरदार हमले से वाइसराय इतना डर गया है कि राजधानी पणजी को पीछे मार्मा गोवा ले जाने का निर्णय ले लिया। अपना खजाना और काग़जपत्र भी वहीं ले जाकर रख रहा है।" शम्भूमहाराज ने प्रसन्न होकर कहा, "कविराज इतने से काम नहीं चलेगा। अगले दो-चार दिनों में हम साष्टी और बारदेश पर पूर्ण अधिकार कर लेंगे। उसके बाद मांडवी को पार करके गोवा के शिखर पर अपना भगवा ध्वज फहराएँगे।" यह चर्चा चल ही रही थी कि बाहर किसी के चिल्लाने की आवाज आयी। वह कह रहा था—"महाराज न्याय कीजिए। हमारी व्यथा-कथा सुनिये।" एक ही ताल-सुर में असंख्य आवाजें एक साथ भीतर आने लगीं। बाहर हजार पाँच सौ लोग एकत्र हो गये थे। कार्य में व्यस्त होने के कारण महाराज ने कवि कलश की ओर संकेत किया। कवि कलश तत्काल उठकर बाहर चले गये। शम्भूमहाराज आक्रमण सम्बन्धी किसी कागज को पढ़ रहे थे। किन्तु बाहर का शोर बढ़ता ही जा रहा था। महाराज ने अपने एक कर्मचारी से पूछा, "इतना हो हल्ला किसलिए हो रहा है?" "ये लोग साष्टी से आये हैं, महाराज! वहाँ के उत्साही लोग हाथ में मशालें लेकर वहाँ की चर्च को जलाने का प्रयत्न कर रहे हैं। किन्तु हमारे अधिकारी राणोजी मोरे ने उन्हें पीट-पीटकर भगा दिया। इसी कारण से वे लोग बहुत रुष्ट हैं और किसी भी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।" यह समाचार सुनते ही महाराज उठकर उन लोगों के पास पहुँचे। महाराज को देखते ही चिल्ला रहे लोग शान्त हो गये। कुछ समय तक लोग आँखें फाड़कर 482 :: सम्भाजी