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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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अन्तराल से पुनः चर्चा आरम्भ हुई। अपनी पिछली बात को आगे बढ़ाते हुए शम्भूमहाराज ने कहा, "जिस प्रकार व्यापारी बाजारों में अपनी दुकानें लगाते हैं उसी तरह गोदामें तैयार कीजिए, किले नहीं।" "महाराज हमें थोड़ी अधिक सहूलियत दीजिए।" गैरी ने कहा। अन्त में दोनों पक्षों ने समझौता किया। गोदामों की लम्बाई 60 कोविद चौड़ाई 15 कोविद, ऊँचाई ढाई कोविद निश्चित की गयी और उसे दोनों पक्षों ने स्वीकार कर लिया। शम्भूमहाराज ने प्रश्न किया, "आपकी गोदामों की दीवारों की चौड़ाई कितनी होगी?" "अब जाने भी दीजिए महाराज।" गैरी साहब ने हँसते हुए कहा। "गोदामों की दीवारें किलों की तरह नहीं बनतीं। इस सम्बन्ध में भी इसी समय निश्चित कर लेना चाहिए।" दीवार की चौड़ाई आधी कोविद निश्चित की गयी। राजापुर की गोदाम बनाते समय शिवाजी महाराज ने अँग्रेजों से जो कर्ज लिया था। उसे नीति धर्म के अनुसार देना शम्भूमहाराज ने स्वीकार किया। निश्चित किया गया कि कर्ज की रकम के बदले अँग्रेज नारियल और सुपारी खरीदेंगे। नागोठणें और पेन में भी गोदाम बनाने की स्वीकृति अँग्रेजों को दी गयी। किन्तु महाराज ने कैप्टन गैरी से स्पष्ट कहा कि यातायात और आयात निर्यात पर कर लिया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। अँग्रेज अपनी गोदामों और दुकानों में यहाँ के कितने लोगों को कार्य के लिए नियुक्त करेंगे, इसकी सूची स्थानीय सूबेदार या अदलदार को देना अँग्रेजों के लिए अनिवार्य होगा। यह भी निश्चित किया गया कि जिन लोगों को अँग्रेज काम पर रखेंगे उसकी पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा। अन्त में महाराज ने अपने मन की बात पूछ ली, "कैप्टन गैरी साहब, गुलाम लड़कों का क्या करते हैं?" "महाराज, अब यह मुद्दा किसलिए उठा रहे हैं? आपके पिता गुलामों के लिए चौगुना चुंगी लगाते थे, आप छः गुना, आठ गुना ले लें। यहाँ उद्योग या व्यापार चलाने के लिए गुलाम हमारे लिए आवश्यक होते हैं?" "गुलाम के नाम पर मनुष्यों के साथ कुत्तों, घोड़ों और गधों जैसा व्यवहार हमें स्वीकार नहीं। जंजीरे का वह हैवान सिद्दी हमारे कोंकणी लड़कों को भगाकर ले जाता है और मुँहमाँगी कीमत लेकर मुम्बई में बेच देता है और तुम लोग अपनी रकम वसूलने के लिए उनकी पीठ की चमड़ी उधेड़ देते हो। बिना नहाये धोये ही ये बच्चे महीनों का समय गुजार देते हैं। इस प्रकार का अत्याचार हम अपने राज्य में नहीं चलने देंगे।" शम्भूमहाराज के शब्दों में इतनी दृढ़ता थी कि कैप्टन गैरी और उनके साथी सम्भाजी 515