छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंको सम्भाजी के पास वीरवाड़ी भेज दिया था। शम्भूराजा का दबाव कम हो और अंग्रेज चैन की नींद सो सकें इसके लिए वे समझौते के लिए तैयार थे। महाराज ने किले के वकीली महल में अंग्रेज वकीलों का स्वागत किया। अनेक गाँवों के अमलदार और सेना के बहुत से लोग वीरवाड़ी में एकत्र हो गये थे। वहाँ पर मेले जैसी भीड़ एकत्र हो गयी थी। प्रातःकाल में ही सम्भाजी महाराज ने निराजी को बुलाकर मेहमानों की व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। उस समय प्रह्लाद निराजी ने धीरे से कहा, "महाराज आपकी इच्छानुसार सौदे की बात की जाती तो कितना अच्छा होता?" "कौन-सा सौदा?" "अंग्रेजों से मुम्बई खरीदने का सौदा।" महाराज प्रसन्नतापूर्वक हँसकर बोले, "पन्त हमने कुछ कम प्रयास नहीं किया। मुम्बई के लिए अंग्रेजों को हम चालीस हजार पगोडा रकम देने को हम तैयार थे। वह रकम आगे चलकर अस्सी हजार तक पहुँच गयी तो ठीक था। मुम्बई की बन्दरगाह सचमुच कुबेर के खजाने की चाभी है इसे पाने के लिए हमारा मन कब से व्याकुल हो रहा है।" "तो महाराज घोड़ा रुक कहाँ गया?" "गवर्नर केजविन तो मुम्बई को हमारी झोली में डालकर पीछे हटने को तैयार था। किन्तु उन धूर्त सूरत वालों के कारण सौदा टूट गया। सिद्दियों ने सूरत वालों से कहा था, "यदि मराठों का कब्जा मुम्बई पर हो गया हमें जलसमाधि लेनी पड़ेगी।" "पन्त, अब क्या कहें भाग्य ने मेरे साथ एकबार फिर खिलवाड़ किया।" विचार-विमर्श के लिए बैठक का समय समीप आ रहा था। मसौदे के कागजों पर महाराज ने एक नजर डाली। उसी समय बैठक के लिए विशेष रूप से खड़े किये गये तम्बू में दुभाषिया राम शेणवी माहब लोगों को लेकर आ गया। मुख्य रूप से अंग्रेजों को जगह-जगह पर गोदियाँ बनाने की स्वीकृति सम्भाजी से लेनी थी। जिंजी और मद्रास की ओर अंग्रेजों का विशेष ध्यान था। यह तटीय प्रदेश मराठों के अधिकार में था। गोदामें बनाने के लिए महाराज की अनुमति मिलते ही कैप्टन गैरी बेहद प्रसन्न हो गये। दूसरे ही क्षण उसके उत्साह को कम करते हुए महाराज ने कहा, "आप प्रसन्नता से अपने व्यापार और उद्योग बढ़ाइए। किन्तु गोदामें बनाने के नाम पर अपने गढ़ और किले बनाने की कोशिश न करें। कितनी जगह पर आप गोदाम बनाएँगे इसकी सूचना भी पहले देनी होगी। इसका स्पष्ट उल्लेख इसी समय इस सन्धिपत्र में होना चाहिए।" महाराज की बात सुनकर गैरी चुप हो गया। अपने सहकारियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए उसने महाराज से कुछ समय माँगा। एक घंटे के 514 :: सम्भाजी